काश वो स्कूल नहीं जाती!-शिव व्यास

काश वो स्कूल नहीं जाती!-शिव व्यास

आँगन की कली बिछड़ जाती है उस घर से
जो हर बार स्कूल से आकर दरवाजा खटखटाती है
जिस आँगन में जाती वहां चार-चांद लगा देती होगी,
चिल्लाकर-चिल्लाकर उसने मौहल्ले को इकट्ठा कर अपनी
सहेलियों की दोस्ती बतलाती होगी, उस दिन दरवाजा उसके
मृत शरीर ने खटखटाया होगा, सन्नाटा सा होगा दिव्या के इर्दगिर्द,
हिचकिचाहट सी होगी दिल में, पापा को चेहरा दिखाने में डर रही होगी,
मां की गोद में न बैठकर अपना अतीत उसकी काया में रखकर सो गई होगी,
भाई की कलाई पर आखरी रक्षा का परिणय सूत्र बांध कर रो रही होगी।
उस अलौकिक नायिका ने तेरा किया बिगाड़ा था।

 

                   शिव व्यास

               खरगोन, मध्य, प्रदेश

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