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कृषि विधेयकों का विरोध-वीरेंद्र देवांगना

कृषि विधेयकों का विरोधःः
केंद्र सरकार द्वारा अभी हाल में किसानों की आयवृद्धि के उद्देश्य से तीन विधेयक पारित किया गया है। आश्चर्य यह कि इसका विरोध उस विपक्ष के द्वारा किया जा रहा है, जिसके चुनावी घोषणापत्र में किसानों के लिए इसी तरह के प्रावधान करने की बात कही गई थी।
इस विरोध को हवा देने से जहां पंजाब, राजस्थान व हरियाणा के किसान भड़क गए हैं, वहीं एनडीए की सहयोगी शिरोमणी अकाली दल की नेत्री हरसिमरन कौर ने मंत्रीपद से इस्तीफा देकर जलती आग में घी डालने का काम कर दिया है। ये हैं, वे तीन कृषि विधेयक, उसके प्रावधान और किसानों को होनेवाला फायदा।
1. कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य विधेयक-2020ः ऐसी व्यवस्था बनाना, जहां किसान व व्यापारी राज्यों में स्थित कृषि उत्पाद बाजार समिति से बाहर उत्पादों की खरीद-बिक्री कर सकें। राज्य के भीतर तथा राज्य के बाहर किसानों के उत्पादों के निर्बाध व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके। व्यापार व परिवहन लागत को कम कर किसानों को उनके उत्पादों का अधिक मूल्य दिलवाना। ई-ट्रेडिंग के लिए सुविधाजनक तंत्र विकसित करना।
फायदाः इस विधेयक से किसानों को फायदा यह होगा कि वे अपने उत्पादों को बेचने के लिए मंडी के व्यापारियों तक ही सीमित नहीं रहेंगे। इससे आढ़तिया व बिचैलिया प्रथा पर चोट होगी। वे मंडियों के अतिरिक्त फार्मसेट, कोल्ड स्टोर, वेयरहाउस व प्रसंस्करण इकाइयों के पास अपना उपज बेच सकेंगे। अब देश में प्रतिस्पर्धी व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे पारदर्शिता अधिक होगी।
2. मूल्य आश्वासन व कृषिसेवा विधेयक-2020ः इस विधेयक से किसानों को कृषि कारोबार करनेवाली कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों व संगठित खुदरा विक्रेताओं से सीधे जोड़ना। कृषि उत्पादों का पूर्व से ही दाम तय कर व्यापारियों से करार की सुविधा प्रदान करना। पांच एकड़ से कम भूमिवाले सीमांत व छोटे किसानों को समूह व अनुबंधित कृषि का लाभ देना। बाजार की अनिश्चितता के खतरे का नुकसान किसानों की बजाय प्रायोजकों पर निर्धारित करना। अधिक उत्पादन के लिए किसानों तक आधुनिक प्रौद्योगिकी पहुंचाना। विपणन की लागत को कम कर किसानों की आय को बढ़ाना। बिचैलियों की बाधा को दूर करना। 30 दिनों के भीतर विवादों के निपटारे की व्यवस्था करना।
फायदाः इससे कृषिक्षेत्र में शोध व विकास को बढ़ावा मिलेगा। अनुबंधित किसानों को सभी प्रकार के कृषि उपकरणों की सुविधाजनक आपूर्ति संभव होगी। अनुबंधित किसानों को उत्पाद बेचने के लिए मंडियों या व्यापारियों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। किसान को नियमित भुगतान मिलेगा। खेत में ही उपज की गुणवत्ता जांच, ग्रेडिंग, बेगिंग व परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020ः अनाज, दलहन, तिलहन, प्याज व आलू आदि को आवश्यक वस्तु की सूची से हटाना। युद्ध जैसी अपवादित स्थिति को छोड़कर इन उत्पादों के संग्रह की सीमा तय होगी। इसके प्रावधान से कृषिक्षेत्र में निजी व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्हंे कारोबार में नियामकों के बेवजह हस्तक्षेप का भय नहीं रहेगा। कीमतों में स्थिरता आएगी। प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा। कृषि-उत्पाद का नुकसान कम होगा। कोल्ड स्टोर व खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण में निवेश को प्रोत्साहन
फायदाः जब सब्जियों की कीमत दोगुनी हो जाएगी या खराब न होनेवाले अनाज का मूल्य 50 फीसद बढ़ जाएगा, तब सरकार भंडारण की सीमा तय कर देगी। युद्ध व आपदा जैसी स्थिति में उत्पादों की कीमतों का नियंत्रण सरकार के हाथों में होगा। कोल्ड स्टोर व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश बढ़ेगा। वे अपनी क्षमतानुसार उत्पादों का भंडारण कर सकेंगे। फसलों को लेकर किसानों की अनिश्चितता खत्म हो जाएगी। व्यापारी आलू व प्याज जैसी फसलों की भी ज्यादा खरीद कर उनका कोल्ड स्टोर में भंडारण कर सकेंगे।
सवाल यह कि इसमें कहां-कुछ गलत है। जब किसान बिचैलियों से मुक्त होंगे, उनके उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा, उन्हें राज्य टैक्स देना होगा, न मंडीशुल्क, तब ऐसे कानून का विरोध करना कहां तक तर्कसंगत है? इसमें सरकारी खरीद यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य का सिस्टम कार्पोरेट लाभ की वृत्ति पर रोक लगाएगा। यह शीत-श्रृंखला और देशव्यापी विपणन सिस्टम लाएगा, तो किसानों का कैसे नुकसान होगा? एमएसपी भी बना रहेगा।
इससे किसान नुकसान में रहेंगे, न उपभोक्ता। उपभोक्ता को भी सही कीमत पर वाजिब वस्तुएं मुहैया होंगी। हां, नुकसानी उठानी पड़ेगी, तो केवल आढ़तियों को। क्या विपक्ष इन्हीं के हितवर्धन के लिए इतना हायतौबा मचा रहा है? इसी तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वह विधेयक को लेकर देशवासियों के मन में भय व भ्रम पैदा कर रहा है।
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