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माँ-आरजू-आरा

माँ आपने ही मुझे इस रंग-बिरंगे संसार मे लाया।
आपने मुझे प्यार किया, दुलार किया, पलाया-बढ़ाया।
आपने मुझे बचपन मे कहानियाँ, लोरियाँ सुनाया।
आपने ही मुझे उंगली पकड़कर चलना सिखाया।

आप ही जीवन क्या है? समझाते हो,
दुनिया के तौर-तरिके सिखाते हो,बडो़ का आदर करना, छोटे को प्यार करना, आप ही सिखाते हो।
आप ही तो मेरी पहली शिक्षिका हो।

आप अपनी बेटी को देखते ही उसका हाल पता कर लेती हो।
खुद भूखी रहती हो और अपनी बेटी को खिलाती हो।
सुबह से शाम तक अपनी बेटी की इचछाएँ पूरी करती हो।
आप ही तो ,मेरी पहली दोस्त हो।

कभी गुस्से में आकर दो-चार थप्पड़ लगती हो, फिर बड़ा प्यार करती हो।
आप अपनी बेटी का उम्र भर साथ देती हो।
सब साथ छोड़ देते हैं, मगर आप अपनी बेटी का साथ कभी न छोड़ती हो।
आप ही आपनी बेटी के हर मुश्किलों को आसान बनाती हो।

आप अपनी बेटी के हर छोटी -बड़ी चीजों का ख्याल रखती हो।
हर रोज़ मेरे पसंद का खाना आप ही बनाते हो।
जब मै नाराज़ होती हूँ, तो आप ही बनाते हो।
जब मै गिरती हूँ हार कर ,तो आप ही साहस बढा़ते हो।

आपको अपनी बेटी की खुशी होती है, बड़ी पसंद।
मेरे ख़ातिर तो कभी-कभी आप दुनिया से झगड़ जाती हो।
अपनी बेटी की जित की खुशी सबसे अधिक आपको ही होती है।
बहुत प्यार करती हो ,अपनी बेटी से उसे विदा कर, कैसे रह पाओगी?

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