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महात्मा गांधी और महान क्रांतिकारी भगतसिंह-अभय-शर्मा

हमारे बापू और क्रांतिकारी भगतसिंह*

आज हम बात करते हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और क्रांतिकारी भगत सिंह के बारे में, यह बात में आपको बताना चाहूंगा कि महात्मा गांधी और भगतसिंह यह दोनों सिर्फ एक चर्चित नाम ही नही वरन एक सोच है । यह एक ऐसी सोच है जो पूरे देश को ही नहीं वरन् पूरे दुनिया को बदलने की ताकत रखती हैं अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी और महान क्रांतिकारी भगत सिंह का जीवन मेरे और आपके ही तरह सामान्य रहा है परंतु सामान्य जीवन जीने के बाद भी उन्होंने एक मिसाल कायम की है। महात्मा गांधी ने अहिंसा को अपना हथियार बनाया और भगत सिंह ने हिंसा को अपना हथियार बनाकर ब्रिटिश शासन को भारत छोड़ने पर विवश किया है इतना बड़ा कार्य करने के बाद यह बात सुनकर बहुत दुख होता है कि आज हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और महान क्रांतिकारी भगत सिंह की तुलना कर एक को अच्छा तो दूसरे को बुरा कह कर अपशब्द और उनकी निंदा करते हैं। उनका सिर्फ यह मानना है कि हमारे देश के महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की फांसी को महात्मा गांधी जी रोक सकते थे । यह बात पूर्णत: असत्य है महात्मा गांधी जी कभी भी नहीं चाहते थे कि भगतसिंह जैसे महान क्रांतिकारी युवा को फांसी की सजा मिले। गांधीजी के बारे में मैने जितना पढ़ा है उसके आधार पर यह बात सत्य है कि गांधीजी भगत सिंह को अपने पुत्र की तरह मानते थे। अंग्रेजों को देश से निकालने में जितना श्रेय महात्मा गांधी का है उतना ही श्रेय उन सभी क्रांतिकारियों का भी हैं जो देश की आजादी के लिए शहीद हुए हैं मैं महात्मा गांधी और भगत सिंह दोनों को एक समान समझता हूं । सोच और कार्यपद्धती चाहे अलग अलग हो परंतु लक्ष्य एक था और वह लक्ष्य अवश्य पूरा हुआ है । आज इस लेख के माध्यम से मैं दोनों विभूतियों को नमन करता हूं और उनको यह बताना चाहता हूं कि आप जैसे महापुरुषों की वजह से आज देश आजादी की सांस ले रहा है ।
जय भगत जय गांधी एवं जय हिंद।

आपका अपना
अभय शर्मा
गांव कंघट्टी जिला मंदसौर मध्यप्रदेश

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