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मन-पूनम मिश्रा

जब मैं बहुत छोटी थी तब मैं अपने माता-पिता के साथ दादा दादी के यहां उनके पास गांव में जाती थी गर्मी की छुट्टियों में हम सब भाई बहन अपने दादा जी के साथ बहुत सी बातें किया करते थे उस समय दादा जी के मुख से मैंने बार-बार एक शब्द सुना था कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत उस समय मैं और मेरी बड़ी बहन इस बात को लेकर के और दादा जी का बहुत मजाक उड़ाते थे कि और आपस में कहते थे कि दादाजी की काफी एज हो गई है इनको कुछ समझ में नहीं आता है और यह बार-बार मन की बात करते रहते हैं परंतु जब मैं बड़ी हुई और मैंने मनोविज्ञान विषय का अध्ययन किया तब मुझे इस बात का महत्व समझ में आया की सही कहते थे हमारे दादा जी कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत यानी जैसा हम सोचते हैं वैसे ही घटनाएं हमारे जीवन में घटित होने लगती हैं इसको हम आज के आधुनिक युग के विचार से भी समझ सकते हैं कि जैसे एक डेटा प्रोसेसर है यदि उसमें हम कचरा डालेंगे तो कचरा ही बाहर निकलेगा इसका परिणाम इसमें भरी गई सामग्री से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है इसी प्रकार हमारा मन भी एक डेटा प्रोसेसर ही है अतः अच्छे विचार करेंगे तो इसका परिणाम भी हमें अच्छा ही मिलेगा आज के समय में युवा वर्ग से लेकर के छोटा बच्चा तक डिप्रेशन का शिकार है इसका कारण क्या है इस पर विचार करना चाहिए आजकल सभी को कोई न कोई बीमारी अवश्य है जैसे सिर दर्द अस्थमा अल्सर माइग्रेन ब्लड प्रेशर हृदय रोग डायबिटीज हाइपर एवं हाइपो थायराइड अधिकांश चमड़ी के रोग आदि के निर्माण में मन का महत्वपूर्ण भूमिका रहा है निसंदेह मानसिक रोगों का मूल तो मन ही है मन के विषय में मेडिकल कॉलेज में तो बहुत कम ही पढ़ाया जाता है जिसने मन को मोड़ने की कला को सीख ली उसे और कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है अर्थात यदि हम मन पर नियंत्रण कर लेते हैं तो हम बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं अगर हमें सही विधि का पता चल जाए तो हम मन पर विजय प्राप्त भी कर सकते हैं मन के विषय में मनोविज्ञान में पढ़ा जाता है जो कि मनोविज्ञान को आत्मा के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया गया था न की बीमारियों के अध्ययन के रूप में मनोविज्ञान में आत्मा चेतना दिव्यता प्यार तथा ईश्वर के बारे में जिक्र तो नहीं किया जाता है इसीलिए इसे अधूरा कहा जाता है मन से सोचते सोचते इंसान कई बीमारियों से ग्रसित हो जाता है और उसे पता भी नहीं चलता है जैसे कुछ लोग होते हैं जोकि व्यर्थ में लेटे रहना पसंद करते हैं और अपनी भूतकाल को याद करते हैं लोगों के सामने यह दिखाते हैं कि उनकी तबीयत सही नहीं है और वह बिस्तर पर पड़े पड़े सोचते रहते हैं और भूतकाल में उन्होंने क्या गलतियां की थी उन्हें क्या परेशानी थी उसके बारे में हिसाब किताब लगाते रहते हैं और लोगों के सामने अपने आप को ऐसे बैठ कर देते हैं कि उनका किसी से कोई मतलब नहीं है वह एक दिखावा मात्र करते हैं इसके बजाय यदि वह उठकर थोड़ा इधर-उधर लोगों से मिले थोड़ा चले पहले तो शायद उन्हें अच्छा महसूस होगा बजाय इसके कि वह बार-बार लेटे-लेटे सोच रहे हैं सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए अपने आप को आइसोलेट करते हैं पर वास्तव में वह बहुत कुछ सोच रहे होते हैं उनके मन में काफी कुछ चल रहा होता है जैसे कई व्यापारी बाहर एक बोर्ड लगा देते हैं की स्टॉक खत्म हो गया है परंतु अंदर बहुत सामान भरा होता है ठीक वैसे ही व्यक्ति दिखावा मात्र करता है कि उसे किसी से कोई मतलब नहीं है परंतु वास्तव में बहुत कुछ सोच रहा होता है मन ही मन सोच कर के अपने आप को बीमार कर रहा होता है ऐसे व्यक्ति के लिए मैं यह सलाह दूंगी कि आप अपने इस छोटे से जीवन को बर्बाद ना करें इस छोटे से को काम में लगाऐ अपने आप को अच्छा महसूस होने दें कुछ ऐसा कार्य करें जिससे आपका जीवन खुशनुमा हो हमारे जीवन को दूसरे लोग नियंत्रित ना कर पाए अगर हम इस जीवन में खुश नहीं हो पाए तो हम दूसरे जीवन में क्या कर पाएंगे मन से अपने आप को स्ट्रांग बनाएं जीवन में आने वाली छोटी-छोटी समस्याओं को इग्नोर करें जैसे कुछ लोग होते हैं बहुत टोका टिप्पणी करते हैं ऐसे लोगों से दूर रहें उनकी बातों को इग्नोर करें नहीं तो जीवन में घटित होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं हमें मानसिक बीमारी तक ले जा सकती हैं मानसिक बीमारी का इलाज तो संभव है वह भी तभी संभव है जब मरीज अपने आप को स्वयं के परिवर्तन में सक्रिय भूमिका लाने का प्रयास करें वह निष्क्रिय होकर ना रहे मानसिक बीमारियों का भी इलाज होता है मानसिक बीमारियों में नियमित दवा लेना बहुत जरूरी होता है अगर किसी को मानसिक बीमारी हो गई तो वह इसका इलाज करवाएं और इसकी दवा रोज ले अगर एक दिन भी दवा को यह नहीं लेता है तो मस्तिष्क के रसायन कम होने लगते हैं और इसके पहले ली गई दो-तीन महीनों की दवाइयों का का असर भी खत्म हो जाता है सबसे पहले तो हमें अपने मन को स्ट्रांग करना चाहिए और अपने आप को ऐसी स्थिति में ना लाएं इसका पूरा प्रयास करना चाहिए

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Poonam Mishra

Poonam Mishra

Main Poonam Mishra उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से हूं मैंने इतिहास से m.a. एवं b.Ed किया है एवं मुझे ड्राइंग में भी रूचि है मुंबई आर्ट का कोर्स किया है इसके अलावा मुझे कविता कहानी गजल शायरी पढ़ने एवं लिखने का शौक है मैं खुद का कोचिंग इंस्टिट्यूट चलाती हूं किड्स कोचिंग के नाम से मैं बच्चों को पढ़ाती हूं

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