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न्याय कहा हैं -अर्चिता-प्रिया

हर रोज लुटती दरिंदों के हाथों
हवस का शिकार बनती है हैवानोंनों के हाथों !

बेटियां का घर से निकलना दुश्वार हो गया
लुच्चे लफंगे को जीने का अधिकार हो गया !

देश की बेटियां सुरक्षित नहीं
सरकार अभी तक लज्जित नहीं !

आश्वासन देते हैं रोज यहां
करते नहीं है खोज यहां !

हर कुकर्मी के पीछे नेता है
तभी तो कानून उन्हें छोड़ देता है !

जाने कितनी बेटियों की बलि चढ़ी
माताओं की कोख भी अब रोए चली !

इन वहशी दरिंदों को…
बीच चौराहे पर लटकाया जाए !

रूह कांप जाए ऐसी…
सजा इन्हें दिलाई जाए !

बीच-बचाव वकीलों का भी
हुक्का पानी बंद करवाया जाए !

कानून ऐसा बनाया जाए
कुकर्मी का हर चौराहे पर पोस्टर लगाया जाए !

या फिर अपनी बेटी के होते ही
उसे नमक चटाया जाए !

धन्यवाद दोस्तों🙏🙏🌺

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