प्रेम की आँधी- मनीषा कुमारी

प्रेम की आँधी- मनीषा कुमारी

             प्रेम की आंधी
 तोड़ो आतंकवाद का जहर  और
 प्रेम की आंधी चलने दो
 नफरत का कांटा तोड़ गिराओ
 अमन का फूल अब खेलने दो
 क्या लेकर आए जो ले जाना है
 फिर बहस किस बात का है
 आए थे अकेले जाना है   अकेला
 फिर बहस किस साथ का
 खून की होली अब ना खेलो
  दीपावली  का दीपक जलने दो
 तोड़ो आतंकवाद का जहर और
 प्रेम की आंधी चलने दो
                    मनीषा कुमारी(रीना)
                       राँची झारखण्ड

Ravikant Agarwal

मैं रविकांत अग्रवाल पुणे महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवी हूँ। मैं साहित्य लाइव में मुख्य संपादक तथा दिशा-लाइव ग्रुप मे प्रेस प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ।

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