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प्रजाति-फौजिया

प्रजाति
उसने अभी अभी दो बच्चे जन्म दिये थे बहुत ही कमज़ोर हो गयी थी  , अभी पिछले वर्ष भी दिसंबर मे भी दो जुड़वा बच्चे जन्मे थे, उन्हे सीने से लगा कर बैठी रहती कहीं नही जाती। बच्चे छाती मे चिपके रहते अपने पेट भरने को।
  उसका कोई ठिकाना नही था। मेरे घर के बाहर ही बैठी रहती  मै उसे कुछ खाने को दे देती  लेकिन वो हमेशा खाने को तो दौड़ती लेकिन खा नही पाती  दूसरे उसी की प्रजाति के दौड़ कर खा लेते , बाद मे जो कुछ बचता वो खा लेती  । कभी कभी मै उसे ही खड़े होकर कुछ खाने को देती तो भी दूसरे दौड़ते वो पीछे हट जाती । कुट्टू नाम हमने उसका रखा था  । वो लेडी डॉग थी  ।
मै हमेशा मन मे सोचती भगवान ने शायद जानवर हो या इंसान सभी मे   फीमेल प्रजाति को सहनशील और त्याग करने के लिए ही बनाया है ।
एक औरत भी हमेशा अपने अधिकार नहीं मांगती, क्योंकि उसके अधिकारों के मांगने से अगर पुरुष प्रजाति का नुकसान हो रहा हो तो वो पीछे हट जाती है। घर से उसे सिखाया जाता है शायद भगवान भी उसे इसी तरह बनाता है ।
कुट्टू ने बच्चे जन्मे थे बहुत ही सुंदर सुंदर। जो डॉग था जो उसका खाना भी खा जाता था उसी की रंग रूप के पड़े थे बच्चे  । लेडी डॉग भूखी रह कर उन बच्चों को दूध पिलाती। वो कभी कभी अपने ही बच्चों पे हमला कर देता। बेचारी उसी से अपने बच्चों की सुरक्षा करती रहती।

मै कभी कभी सोचती हूँ, बहुत से भारतीय परिवारों मे भी यही होता है, औरत हमेशा अपने परिवारों की सलामती के लिए अपने अधिकारों से पीछे हटती है। कभी भी पुरुष समाज का विरोध नहीं कर पाती शायद भगवान ने उसे इसीलिए बनाया उसका कोमल हृदय बनाया है एक लड़की को बचपन से सिखाया जाता है भाई के लिए त्याग, या पीछे हटना। इसीलिए शायद महिला की अस्मिता पे कभी भी हमला होता है चाहे मानसिक हो या शरीरिक वो कभी भी विरोध नही कर पाती  ।
हमारे भारतीय समाज मे घर से ही ये सिलसिला चालू होता है बेटे को ज्यादा खाना देना या दूध सिर्फ पुरुषों को ही पीने को देना लड़कियो से घर का काम ज़्यादा से ज्यादा लेना यहाँ तक की पढाई के मामले मे भी लड़के की पढाई मे ज़्यादा खर्च करना, हाँ अगर किसी परिवार की लड़की अपनी व्यक्तिगत मेहनत से आगे निकल जाए तो पुरुष समाज हो या परिवार,अपना कंधा थपथपाते है वो ये जताते है की उन्होंने उपकार किया और आगे बढ़ने दिया, हमे अपने परिवार से अपने घर से ही एक लड़की को विरोध करना सिखाना होगा एक गरिमामय तरीके से। तब वो कभी भी अत्याचार नहीं सहेगी । अपने अधिकार का प्रयोग कर सकेगी।
अगर हम इस प्रजाति की रक्षा नहीं करेंगे तो विलुप्त हो सकती है।

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