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सपना-पूनम मिश्रा

सपनों को तोड़ दूं
या दिल करता है
यह शहर छोड़ दूं
हाथों पर बनी
इन लकीरों को मोड़ लूं
या किस्मत से मिले फैसले को तोड़ दूं
तुम ही बताओ
तुम जो ना मिले मेरी जिंदगी में
बस यही तमन्ना है कि मैं यह जग छोड़ दूं

1 thought on “सपना-पूनम मिश्रा”

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