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संविधान निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानेवाले छग के माटीपुत्र-वीरेंद्र देवांगना

संविधान निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानेवाले छग के माटीपुत्र::
ब्रिटिश सरकार के आधिपत्य से स्वतंत्र होने के बाद संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य भारत के लिए अपना संविधान तैयार किया गया, जिसे 26 नवंबर 1949 को अंगीकार किया गया था। यही संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
संविधान निर्माण में छत्तीसगढ़ के 5 धरतीपुत्रों ने भी अहम भूमिका निभाई और मूल संविधान पर हस्ताक्षर किए। छग अंचल के रियासतों से रायगढ़ के किशोरीमोहन त्रिपाठी व कांकेर के रामप्रसाद पोटाई तथा मध्यप्रांत व सीपी बरार के प्रतिनिधि के रूप में रायपुर से पंडित रविशंकर शुक्ल, बालोद से बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल और दुर्ग से धनश्याम सिंह गुप्ता शरीक हुए थे।
इन महान विभूतियों के नाम से आज प्रदेश में विश्वविद्यालय, कालेज व स्कूल संचालित है।
इसमें पं. किशोरीमोहन त्रिपाठी ने बालश्रम को रोकने व महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के अनुरूप पंचायती राज की स्थापना को संविधान में शामिल करवाया।
कांकेर जिले के कन्हारपुरी निवासी रामप्रसाद पोटाई ने जहां अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए संविधान में आवाज उठाई, वहीं मध्यप्रांत की रियासतों के विलयीकरण की मांग का मेमोरंेडम सरदार पटेल को सौंपा था।
वहीं, धनश्याम सिंह गुप्ता ने संविधान में हिंदी शब्दावली पर अहम योगदान दिया था। इन्हीं के नाम से आज बालोद में कालेज है।
बिलासपुर के अकलतरा में 1886 में जन्में ठाकुर छेदीलाल हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू व संस्कृत के ज्ञाता थे। उन्होंने बिलासपुर अंचल में जागरूकता के लिए रामलीला मंच का अभिनव प्रयोग किया था। उनके नाम से आज जांजगीर-चांपा जिले में महाविद्यालय संचालित है।
पं. रविशकर शुक्ल स्वतंत्रता सेनानियों मे अग्रणी थे, जिन्हें मध्यप्रदेश का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया था। इनके के नाम से रायपुर में विश्वविद्यालय संचालित है।
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