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ताज होटल में जयदेव बघेल की कलाकृति अक्षुण्य-वीरेंद्र देवांगना

ताज होटल में जयदेव बघेल की कलाकृति अक्षुण्य::
26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल में हुए आतंकी हमले में वहां की चीजें सभी ओर बिखरी पड़ी थीं, लेकिन छग के बस्तर की बेलमेटल कलाकृति ‘ट्री आफ लाइफ’ पूरी तरह सुरक्षित थी।
महुआ पेड़ की इस विश्वप्रसिद्ध कलाकृति के लिए स्वर्गीय जयदेव बघेल को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला है।
नवंबर 2010 में भारत दौरे पर आए अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा, अपनी पत्नी मिशेल ओबामा के साथ इसी कल्पवृक्ष के करीब खड़े होकर शोक पुस्तिका पर 26/11 के शहीदों के लिए शोक संदेश लिखकर श्रद्धांजलि दी थी।
हर साल 26/11 को इसी महान कलाकृति के नीचे कैंडल जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के ग्राम भेलवापदर में 1950 में जन्में जयदेव बघेल को शिल्पकला विरासत में मिली थी। उन्होंने घड़वाकला, ढोकराकला, लौहशिल्प और बेलमेटल को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
साल 2000 में उन्होंने मुंबई के जहांगीर आर्ट गैलरी में बेलमेटल कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई थी। इसमें वह महुआ का कल्पवृक्ष भी शामिल था, जो 26/11 के मुंबई के ताज होटल में आतंकी हमले में हिफाजत से था।
यह कल्पवृक्ष 90 किग्रा वजनी और 5 फीट ऊंची थी, जिसकी खूबसूरती से प्रभावित होकर ताज होटल प्रबंधन ने इसे खरीदा था।
जयदेव बघेल को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्मानित किया था।
साल 2003 में पंडित रविशंकर शुक्ल विवि रायपुर ने उन्हें डाक्टरेट की मानद उपाधि दी थी। उन्होंने मास्को, सिंगापुर, आस्टेªेलिया, जर्मनी, लंदन, स्काटलैंड, हांगकांग, बैंकाक, टोक्यो, इटली, पेरिस में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई थी। उन्हें साल 1977 में कलाजगत का शिखर सम्मान मिला।
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