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साक्षात्कार-साथी – टी

मैं एक बर्तन हूं
कर्म करके मेरे शरीर पर
मालिन्य पड़ गया।
मालिन्य के निवारण के लिए
मेरे शरीर पर मिट्टी का
लेपन किया ।
जब यह पानी से धोया तो
मैं जगमगा जैसे सोना ।
यह मालिन्य ‘गंदे मन’ है,
मिट्टी का लेपन ‘ कर्मानुष्ठान ‘है,
धोए हुए पानी ‘ भक्ति’ है,
‘ज्ञान से जगमगा है।
परमात्मा का साक्षात्कार भी
हो गया ।

  • डॉ सती गोपालकृष्णन

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