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तुम्हें कविता-पूनम मिश्रा

तुम्हें दुआओं में सबसे ऊपर रखा है
तुम्हें दिल में बेहिसाब रखा है
ना कम ना ज्यादा असीमित प्यार रखा है
मुझे तुमसे न कोई शिकवा ना गिला
मैंने तुम्हें तो अपनी हर एक सांस में रखा है
मुझे भी शामिल कर लो अपनी दुआओं में क्योंकि तुम्हें तो मैंने दिल में बसा रखा है

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