बच्चियों की सुरक्षा सबसे बड़ा प्रश्न-पूजा पत्नी

बच्चियों की सुरक्षा सबसे बड़ा प्रश्न-पूजा पत्नी

पोशम पा जी पोशम पा
शैतानों ने क्या किया
फिर एक छोटी बच्ची की
इज़्जत लूटी, उसे तड़पाया
उसे मौत के मुँह तक पहुँचाया

क्या उसको जेल में जाना पड़ेगा।
जेल की रोटी खानी पड़ेगी।
जेल का पानी पीना पड़ेगा।

आप सबको यह खेल याद होगा। जब हम छोटे थे और अब भी यह खेला जाता है। पर आज इस खेल का यह रूप देखकर आपको हैरानी हुई होगी। पर क्या करे जनाब यह आज के समाज का कटु सत्य है। और यह भी सच है कि यह उस खेल का भयानक रूप है। और इस पुराने खेल में डाकू पकड़ा जाता था और उसे सजा भी मिलती थी। परंतु आज के समय में दोषी पकड़े भी जाते है पर सजा नहीं मिल पाती। अगर सही मायनो में सजा दी जाती तो इस तरह के कुकृम पर रोक लग गई होती। परंतु ऐसा नहीं हुआ। याद होगा आपको र्निभया काण्ड के दोषियों को अभी जाकर कुछ समय पहले ही सजा मिली थी।
आप भी कहते होगें कि मैं क्या पुरानी बातें लेकर बैठ गई हूँ। परंतु क्या किया जाए। यह इतनी दृदनाक घटना थी जिसके दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी कि वो औरों के लिए सबक होनी चाहिए थी। पंरतु क्या किया जाए उसके बाद से तो यह दुष्कृम उस बेचारी से आधी से भी कम उम्र की बच्चियों के साथ हो रहा है तो आप ही बताऐं यह बातें नहीं उठेंगी।
निभ्रया काण्ड के दोषियों को हमारे देश के कानून के लचीलेपन का भरपूर फायदा मिला। उनमें से एक डराईवर ही था जिसने आत्महत्या कर ली थी। जबकि वह सभी दोषी सजा-ए-मौत के हकदार थे। अगर वह भी जिन्दा होता तो उसे फायदा ही होता नुकसान कुछ नहीं होता। यह बात लिखते हुए मुझे बहुत ही शरम महसूस हो रही है।
अभी हाल ही में कठुआ काण्ड हुआ था। जिसके बाद प्रधानमंत्री जी ने कानून निकाला था कि “12 साल से कम आयु की बच्ची के साथ अगर कोई गलत करता है तो उसे फाँसी दी जाएगी” । इस बात को लेकर भी बहुत सारी बातें उठी कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले कुछ सोचा गया है या नहीं। लेकिन आज सारा समाज यह बात उनसे पूछता है कि “ अब जो मंदसौर जिले में 8 साल की बच्ची के साथ जो गलत हुआ और जिस क्रूरता से हुआ है” उसे देखते हुए क्या अब भी प्रधानमंत्री जी के फैसले पर सोचने की जरूरत है या उस पर अमल करने की जरूरत है। मेरा मानना है की हर कानून में मौत की सजा मौत है तो इस अपराध में यह सजा देने में इतनी देर क्यों होती है।
ऐसे दोषियों को न तो कोई वकील मिलना चाहिए न ही इन पर अदालत में केस चलना चाहिए। इन्हें सीधा फाँसी होनी चाहिए।
क्योंकि इससे बचाव के दो ही रास्ते है:-
• पहला कानून इसके लिए इतना कड़ा हो जाए कि कोई भी ऐसा करने की सोचे तो उसकी रूह काँप जाए।
• दूसरा मेरा सभी अभिभावकों से निवेदन है कि अपने छोटे बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने का काम वह खुद करें। क्योंकि अभी बच्चे बहुत छोटे है न तो वह किसी का मुकाबला कर सकते है न ही वहाँ से भाग सकते है।
• और बच्चों को समझाऐं किसी से कुछ न लें

इन सब बातों का ध्यान रखा जाए तो बच्चों की रक्षा की जा सकती है।

 

पूजा पत्नी

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  • Bahut khub 👌👌👍

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