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बच्चा कमज़ोर है-विष्णु-सोनी

बच्चा पढ़ाई में कमजोर है ?तो इस कहानी को टीचर्स और अभिभावक दोनों ज़रूर पढ़े । ये कहानी है एक ऐसे बच्चे की जो पढ़ाई में कमजोर था।

इस देश में कई ऐसे बच्चे हैं जो पढ़ाई में काफी कमजोर होते है और कभी कभी तो ऐसे मामले भी होते हैं कि पहले तो अच्छा था लेकिन उम्र के साथ साथ आगे जाकर पता नही कैसे कमजोर हो गया ।
और वो कमजोरी उसे अपने सहपाठियों से अलग ले जाती है , टीचर्स और पेरेंट्स भी उस समस्या को सिर्फ थप्पड़ में सॉल्व करने की कोशिश करते हैं । धीरे धीरे वो इस गहराई में डूबता जाता है और बार बार उसे ये एहसास करवाया जाता है कि तुझे कुछ नही आता । नतीजा ये निकलता है कि उसका आत्मबल टूट जाता है और वो खुद को डाइवर्ट कर लेता है और वो कोशिश भी नही करता पढ़ाई को समझने की । और एक दिन ये प्रेसर अति का रूप ले लेता है । और नतीजतन वो पढ़ाई छोड़ देता है । और किसी बाइक मेकेनिक के यहां काम करने लगता है । करीब 20 साल बाद अख़बार में एक खबर छपती है ,और वो खबर क्या थी जानते हैं ? खबर में लिखा था कि एक 7th क्लास पास इंजीनियर ने देश को दिया एक बेहतरीन आविष्कार । जो कि भारत की तस्वीर बदल देगा । इंजीनयर युवक को राष्ट्रपति ख़ुद करेंगे सम्मानित ।
ये वही लड़का था जिसे बरसों पहले कमजोर घोषित किया गया था । दूसरे दिन राष्ट्रपति जी ने सम्मानित किया । और मीडिया ने उसका इंटरव्यू लिया । सवाल पूछा गया कि अपने इस बेहतरीन सफर के बारे में -अपनी इस कामयाबी के बारे में ज़रा बताइये । आपने पढ़ाई क्यों नहीं पूरी की जब आप इतने काबिल थे ,क्या इसकी वजह -घर की आर्थिक समस्या थी ?
तो युवक का पहला शब्द था (दुर्भाग्य ) उन्होंने कहा कि इस देश का ये दुर्भाग्य है कि थ्योरी- डिग्रियां तय करती है- प्रेक्टिकल नहीं । मुझे बचपन में बस एक ही समस्या थी और आज भी है कि मेरे दिमाग मे शब्द नहीं ठहरते थे ,वो फिट नही होते थे अपनी अपनी जगह पर । लेकिन मैं प्रेक्टिकली हर चीज़ में अव्वल था और इस बात को बचपन मे किसी ने नही समझा । मैं कमज़ोर घोषित कर दिया गया ,मैं कोशिश करता था मगर बार बार मुझे ताने दिए जाते गए और एक दिन अति हो गई और मैंने स्कूल छोड़ने का फ़ैसला कर लिया ।
फिर मैंने बाइक्स सुधारने में रूचि रक्खी और मैं वो काम करने लगा । कुछ साल बित गए मगर लोगों के और अपनों के ताने खत्म नहीं हुए ।मैं ग्रीस लगे काले कपड़ों में घर लौटता था ।आसपास के लोग अपने बच्चों को मेरा example देने लगे- कहने लगे कि देख अगर नहीं पढेगा तो ऐसा बन जाएगा । मेरा आत्म विश्वास बिल्कुल टूट चुका था ,मैं खुद भी ख़ुद को गलत समझने लगा था ।

फिर अचानक एक दिन मुझे अंदर से कुछ सुनाई दिया कि उठ और जो कुछ तू सोच सकता है वो कर । जहां तक इंसान सोच सकता है वहां तक कर सकता है । पूरी दुनिया को पता चल जाए कुछ ऐसा कर ।कुछ अलग कर जो अब तक किसी ने ना किया हो ।
तो मैंने इस आविष्कार की यात्रा शुरू की और दिन रात इस पर काम किया । पूरे 5 साल में मैंने इसे पूरा कर दिखाया । आज मुझे करोड़ों रुपये के ऑफर्स आ रहे है । लाखों की नौकरी के फोन कॉल्स आ रहे हैं ।।। बस यही था मेरा सफर ।।।
अंत में मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि मुझे सिर्फ शब्द नहीं समझ आते थे इसलिए मैं डिग्री नही ले पाया , मैं कमजोर नहीं था ,अव्वल ही था । ये मेरा नहीं इस देश का दुर्भाग्य है ।
क्यूंकि इस देश में मुझ जैसे लाखों कमजोर घोषित अव्वल है । बच्चे नहीं इस देश की व्यवस्थाएं कमज़ोर है । अगर आपको बच्चों की कमजोरियां मिल गई तो ढूंढने पर काबिलियत भी मिलेगी । तानों से कमजोरियों का विस्तार होता है और काबिलियत का अंत । कृपया बच्चों में अपने मन मुताबिक वाली काबिलियत ना ढूंढे ।
धन्यवाद ।

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