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कोरोना से बचाव महाभारत की कथा से-वीरेंद्र देवांगना

कोरोना से बचाव महाभारत की कथा से::
कोरोना संकट की घड़ी में महाभारत की एक कथा सुनिए और गुनिए कि यह किस तरह सबके लिए अनुकरणीय है।
पांडवों के काका महात्मा विदुर को लगातार अपने गुप्तचरों से पांडवों के खिलाफ दुर्योधन की साजिश की सूचना मिल रही थी। उन्हें पता चल गया था कि वाणावर्त में पूर्वोचन के द्वारा जो राजकीय भवन-लाक्षागृह का निर्माण किया गया है, उसमें बहुतायत में जानवरों की चर्बी, तेल, धासफूस और लाख का प्रयोग किया गया है, जो जरा-सी चिंनगारी से ज्वाला बन सकती है और राखगृह में तब्दील हो सकती है।
यद्यपि पांडवों को वार्णावर्त जाने से रोकना विदुर के वश में नहीं था, तथापि वे उनकी सुरक्षा चाक-चैबंद तो कर ही सकते थे। इसलिए, वे निरंतर उनकी सुरक्षा की तरकीबें सोचा करते थे। इसी का सुपरिणाम है कि लाक्षागृह में खनिक भेजकर उन्होंने समय रहते सुरंग बनवा डाला, ताकि पांडव सुरक्षित वहां से निकल जाएं।
वार्णावर्त प्रस्थान करने से पहले पांडव माता कुंती सहित महात्मा विदुर को प्रणाम करने पहुंचे। विदुर ने अवसर देखकर ज्येष्ठ पांडुकुमार युधिष्ठिर से दावानल का जिक्र करते हुए पूछा,‘‘वत्स, जंगल में भीषण आग लग जाए, तो कौन से जानवर सुरक्षित रहेंगे?’’
युधिष्ठिर ने त्वरा जवाब दिया,‘‘काकाश्री, जंगल में आग लगने पर स्वच्छंद धूमनेवाले शेर, बाघ, चीता, हाथी, हिरण, सियार, नीलगाय, भालू, लकड़बग्गा, बंदर आदि जानवर जलकर भष्म हो जाएंगे। किंतु, बिलों में रहनेवाले चूहे सुरक्षित रहेंगे। दावानल के बाद जब वे बिलों से निकलेंगे, तब उनके जीवन में दावानल का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।’’
इस जवाब से संतुष्ट होते हुए विदुर ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा था,‘‘वत्स युधिष्ठिर, तुम्हारे उत्तर से मैं निश्चिंत और संतुष्ट हुआ। मेरी समस्त चिंताएं दूर हुईं। जाओ सुरक्षित रहो। यशस्वी भवः।’’
कोरोना वायरस भी एक भयानक आग की मानिंद है, जो देश-विदेश में स्वच्छंद विचरण करनेवालों को अपने आगोश में ले रहा है। इसलिए, जो लोग चूहे की माफिक घर रूपी बिलों में कैद रहेंगे, वो सुरक्षित रहेंगे और आगे का जीवन अपनी मर्जी से जीएंगे। कोरोना वस्तुतः छूत का रोग है, जो छूने और एक-दूजे के संपर्क से फैल रहा है।
घर से निकलना यदि जरूरी हो, तो दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी। इसका जरूर ख्याल रखना चाहिए। हाथों को बार-बार धोना व नाक, मुंह, आंख को नहीं छुना और सेनिटाइज करते रहना भी अनिवार्य है।
साथ ही, योग, प्रणायाम, तेज चाल से चलना, खेलना-कूदना और जागिंग करना भी आवश्यक है, ताकि शरीर स्वस्थ रहे। इसी के साथ, घर का बना काढ़ा, नमक-नींबू पानी, गरम पानी नियमित पीते रहना अत्यावश्यक है।
किसी ने सही कहा है,‘‘बड़े दौर गुजरे हैं, जिंदगी का, यह दौर भी गुजर जाएगा। थाम लो अपने पांव घरों में, कोरोना भी थम जाएगा।’’
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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