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देवी का स्वरूप नारी है-सोनम-साल्वे

नौ दिन नवरात्री के हम बडी धूम धाम से मानते है

बडी तयारी के सात हम देवी के स्वागत कि तयारी

करते है 🌹🌹🌹

घर का माहोल बडा प्रसन्न जनक हो जाता है

उसी देवी के नौ रुपो का हर इन्सान बडा आदर सन्मान करता है

पूजा अर्चना करते है पुरे भक्ती से मग्न हो जाते है

देवी का रूप ही नारी एक वरदान है ये हमारा स्वभाग्य हैकी हम एक नारी है
यहा हर नारी, प्यार और इज्जत से जिना चहाती है
मगर आज भी येहा औरतो को पैर की जुती समजते है काहि लोग
आज भी कही लोग अपनि पत्नी की इज्जत नही करते , आज भी हमारे समाज मै औरतो के हक के लिए लडना पडता है
आज भी उसे अपने नीचे देखणा चाहता है अपने से
आगे ना पीछे बस हो घर पर बच्चे और परिवार समाले घर के हर काम करे
पलट के कुछ बोलें नही अगर ओ कुछ बोलती है तो
उसके संस्कार निकलते है कैसी कर्म जली बीवी मिली है मुझे,
गुस्सा आणे पर मार पीट भी करते है फुटे भाग मेरे
ये सब सुना पडता है
क्यू नही समजता इन्सान की ओ जो ऊस शक्ती की पूजा कर रहा है
नारी उसिका प्रतीक है
अपनी माँ, बेटी, बहन, बीवी की अच्च्छी इज्जत किया करो
जो इन्सान अपने ही घर में बीवी की इज्जत नही करता,
हर वक्त घर में कलेश करता है
ऊस घर में लक्षमी माँ कभी वास नही करती , जो इन्सान
औरतो की इज्जत नही करता, उसे कोई हक नही हे
नवरात्री उत्सव मे शामिल होने का पूजा करणे का
जुंटा दिखावा करने का, येतो देवी का ही अपमान
करने के स्वरूप होता है
अभी भी टाईम है संभाल जाये औरतो की इज्जत
करना सिखे
औरते जुल्म सहती है इसका मतलब वो कमजोर नही है
अपने घर परिवार के खातिर हो सहती है
अगर कोई बात अपने आत्मसन्मान पर आई तो
माँ दुर्गा का रुपी ले सकते है
तो संभाल जाये, हर औरतो की इज्जत करना सिखे
नवरात्री के 9 दिन दुर्गा देवी के 9 रूप का प्रतीक है
नारी भी उसी का एक सौरूप हे🙏🙏

नौ दिन नवरात्री के हम बडी धूम धाम से मानते है

बडी तयारी के सात हम देवी के स्वागत कि तयारी

करते है 🌹🌹🌹

घर माहोल बडा प्रसन्न जनक हो जाता है

उसी देवी के नौ रुपो का हर इन्सान बडा आदर सन्मान

करते है पूजा अर्चना करते है पुरे भक्ती से मग्न हो जाते है

देवी का रूप ही नारी एक वरदान है ये हमारा स्वभाग्य है

कि हम एक नारी है

यहा हर कोही नारी, प्यार और इज्जत की भुकी है

मगर आज भी येहा औरतो को पैर की जुती समजते है

कही लोग

यहा कोई आज भी अपनि पत्नी की इज्जत करता नही

आज भी उसे उसे अपने नीचे देखणा चाहता है अपने से

आगे ना पीछे बस हो घर पर बच्चा समाले खाना बनाना

घर के हर काम करे

पलट के कुछ बोलें नही अगर ओ कुछ बोलती है तो

उसके संस्कार निकलते है कैसी कर्म जली बीवी मिली है मुझे,

गुस्सा आणे पर मार पीट भी करते है फुटे भाग मेरे

ये सब सुना पडता है

क्यू नही समजता इन्सान की ओ जो ऊस शक्ती की पूजा कर रहा है

नारी उसिका प्रतीक है

अपनी माँ, बेटी, बेहन, बीवी की अच्च्छी इज्जत किया करो

जो इन्सान अपने ही घर में बीवी की इज्जत नही करता,

हर वक्त घर में कलेश करता है

ऊस घर में लक्षमी माँ कभी वास नही करती , जो इन्सान

औरतो की इज्जत नही करता, उसे कोई हक नही हे

नवरात्री उत्सव मे शामिल होने का

कोई दिखावा करने का, येतो देवी का ही अपमान

करने के स्वरूप होता है

अभी भी टाईम है संभाल जाये औरतो की इज्जत

करना सिखे

औरते जुल्म सहती है इसका मतलब वो कमजोर नही है

अपने घर परिवार के खातिर हो सहती है

अगर वो अपने पे आई तो माँ दुर्गा का रूप भी ले सकते है

तो संभाल जाये, हर औरतो की इज्जत करना सिखे

नवरात्री के 9 दिन दुर्गा देवी के 9 रूप का प्रतीक है

नारी उसी का एक सौरूप हे🙏🙏

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