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गांधी-जयंती पर विशेषः महामारी के दौर में महात्मा गांधी-वीरेंद्र देवांगना

गांधी-जयंती पर विशेषः
महामारी के दौर में महात्मा गांधी::
कोरोना महामारी के इस भयावह दौर में महात्मा गांधी होते, तो कौन-सा संदेश देते है। यह सवाल हर उस गांधीवादियों को सालता है, जो गांधीजी के विचारों में निष्ठा रखते हैं। गांधीजी आधुनिक चिकित्सा-पद्धति के खिलाफ नहीं थे। इसे वे जान बचाने के लिए आवश्यक मानते थे।
लेकिन, उनका जोर आत्मसंयम पर था, इसलिए वे प्राकृतिक व आयुर्वेदिक चिकित्सा-पद्धति को अपनाने की सलाह देते। वे काढ़ा पीने, नींबू-नमक पानी पीने, गरम पानी, गिलोय, आंवला का रस, लौकी, संतरा का जूस पीने की समझाइश देते। शरीर, घर व कोने-कोने की साफ-सफाई की पैरवी करते। हाथ को निरंतर धोने का कहते। रोजाना उपयोग होनेवाली चीजों को बारबार सेनेटाइज करने का सुझाव देते, जैसा अभी कहा जा रहा है।
इसके बावजूद, वे अस्पतालों में बैठ जाते, जहां धांधलियां और गड़बड़ियां हो रही हैं और जहां लूट-पाट मचा हुआ है। वे इतने में ही नहीं रुकते। जहां लोगों का इलाज के बिना मौत हो रहा है, वहां वे भूख-हड़ताल पर बैठ जाते और जब तक व्यवस्था सुधारा नहीं जाता या सुधारे जाने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे बैठे रहते। ऐसे समय में उनके साथ हजारों लोगों का कांरवां होता, जिसको संभालने में पुलिस-प्रशासन का पसीना छूट जाता।
वे भी क्वारेंटाइन, आइसोलेशन, दो गज की दूरी, मास्क आदि की चर्चा किया करते। साथ ही देशभर में यात्राएं करते। हर उस राज्य व शहर में जाते हैं, जहां अव्यवस्था का आलम है।
वे अपनी चर्चाओं में स्वच्छता व साफ-सफाई को सबसे ऊपर रखते। खुले में शौच के लिए लोगों को समझाते है और दो गड्ढेवाला शौचालय बनाने के लिए प्रेरित करते। ऐसे कठिन दौर में वे लोगों को पोषणयुक्त जैविक व सस्ती साग-सब्जी की खेती के लिए प्रोत्साहित करते और उसी का सेवन करने के लिए बार-बार कहते।
हालांकि 1918 में जब स्पैनिश फ्लू ने दुनिया में कहर बरपाया था, तब गांधीजी तो इसकी चपेट से बच गए थे, लेकिन उनके बेटे हरिलाल के पुत्र व हरिलाल की पत्नी महामारी की चपेट में आ गए थे। यह उनके लिए किसी सदमें से कम नहीं था। तब वे साबरमती आश्रम में थे और उनको पेट से संबंधित भयावह संक्रमण हुआ था।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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