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जीवन प्रत्याशा-वीरेंद्र देवांगना

जीवन प्रत्याशा::
अमेरिकन ब्यूरो आफ लेबर द्वारा एक अध्ययन में पाया गया है कि 65 वर्ष और उससे अधिक आयु परः-
– 1 प्रतिशत व्यक्ति समृद्ध थे।
– 4 प्रतिशत व्यक्ति अपना जीवनस्तर कायम रखे हुए थे।
– 23 प्रतिशत व्यक्ति अभी तक काम कर रहे थे। काम के बिना उनका गुजारा
संभव नहीं था।
– 9 प्रतिशत की मृत्यु हो गई थी।
– 63 प्रतिशत अपने बच्चों, वृद्धाश्रमों, धर्मादा ट्रस्टों और विभिन्न शिविरों पर आश्रित
थे।
टीपः यहां व्यक्ति या मनुष्य से आशय महिला और पुरूष, दोनों से है।
इसी तरह रूस की राजधानी मास्को और थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में एक सर्वे करवाया गया कि आखिर इंसान रिटायरमेंट या वृद्धावस्था को प्राप्त होते ही जल्दी अस्वस्थ होकर मौत को क्योंकर प्राप्त होता है। पेंशनर्स से जो आंकड़े और जानकारी मिली, वह भी इसी तथ्य की पुष्टि करता है कि पहले काम में व्यस्त होने के कारण सब-कुछ ठीक-ठाक चल रहा था।
पर जैसे ही रिटायर हुये, पूरी दिनचर्या गड़बड़ा गई। इससे मानसिक दबाव, चिंता, तनाव, अवसाद, पेट का बिगड़ना, हरारत लगना, नींद न आना, सिर व बदन दर्द, अपने आप को खाली, निरर्थक और बेकार समझना जैसे लक्षण दिखने लगे। यही वजह है कि सेवानिवृत या वृद्ध व्यक्ति बार-बार बीमार रहकर बहुत जल्दी मौत के आगोश में समा जाता है।
गौरतलब यह कि जो सीखना बंद कर देता है, वह बूढ़ा हो जाता है। भले ही उसकी उम्र 50, 60 या 70 साल से अधिक हो। यदि दिल-दिमाग और तन-मन को तरोताजा रखना है; हमेशा नौजवान दिखना है, तो सीखना जारी रखना सीखिए।
योग, प्राणायाम व शारीरिक व्यायाम या वाकिंग-जागिंग कीजिए। कोई शौक पालिए और सीख-सीखकर उसको अंजाम तक पहुचाने का धुन पालिए। इससे जहां बुढ़ापा दूर भागेगा, वहीं समययापन की चिंता चंपत हो जाएगा।
यकीन मानिए, इससे हम-आप हमेशा ऊर्जावान और सेहतमंद रहेंगे, जो हमारे-आपके जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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