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कविता, सुरक्षित नहीं आज के नारी-राणा प्रताप-

सुरक्षित नहीं आज के नारी।
कदम कदम पर अत्याचारी।
ब्लैकमेल, झूठ फरेब के मार।
और यौन उत्पीड़न का शिकार ।
आज के नारी इस अपराध से हारी।
कभी अंधेरा उसको सताये।
सुनसान से मन घबराये।
कही दहेज प्रथा के बिमारी।
कितने बहुओ ने जान गवायी।
तलाक सुदा एंव विधवा नारी।
कैसे भी बच्चो साथ जीवन गुजारे ।
अपना रक्षा नारी स्वंय करे।
हर किसी पर ना विश्वास करे।
अपने बल पर जीना सिखे।
नारियो में आत्म विश्वास जगाये।
अपराधियो कोसख्त नियम बनाये ।
दहेज लोभी को कडे सजा सुनाये।
गैंगरेपिस्ट अत्याचारी दरिंदो को।
गोली मारे या फांसी पर चढाये।
आओ नारी समाज को आगे बढाये।
नारी का हक अधिकार दिलाऐ।
महसूस करे सुरक्षा नारी।
इनको यह विश्वास दिलाऐ।
लेखक -राणा प्रताप
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश
मो0न0-7347379048

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