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लक्ष्य का क्रियान्वयन::-वीरेंद्र देवांगना

लक्ष्य का क्रियान्वयन::
यह जरूरी है कि पहले SMART बनिए, फिर लक्ष्य को भी स्मार्ट बनाइए। साथ ही लक्ष्य के क्रियान्वयन के लिए HEAL को अपनाइए। इससे सफलता के द्वार स्वतः खुलते चले जाते हैं। लक्ष्य का क्रियान्यवन HEAL की तरह होने से आप अध्ययन, मनन, चिंतन और स्वमूल्यांकन के गुर सिख जाएंगे और विजेता बन जाएंगे।
HELP (सहायता) लक्ष्य प्राप्ति के लिए दूसरों की सहायता लें और दूसरों को सहायता प्रदान करें। एक जैसे लक्ष्य की ओर बढ़नेवाले व्यक्तियों के लिए परस्पर सहायता इसलिए जरूरी है कि इससे दिमाग के बंद दरवाजे खुलते हैं और व्यक्ति व्यापक तौर पर सोचने-समझने के काबिल बनता है।
यह प्रवृत्ति बैठे-ठाले शिकायत करते रहने और व्यवस्था को गाली देने से बेहतर है कि हम व्यवस्था/सिस्टम का अंग बनकर उसमें मौजूद खामियों को दूर करने का प्रयास करें। इसके लिए एक-दूजे को सहायता करना पहला प्रयास है।
EDUCATE YOUR SELP(स्वयं पढ़ें) रोजाना कोई-न-कोई प्रेरणात्मक किताब, पेपर, पत्रिका, उपन्यास, कहानी, कविता रुचि के अनुसार पढ़े, ताकि ज्ञानार्जन के साथ मनोरंजन होता रहे। इससे बंद दिमाग खुलता है, वह परिपक्व होता है, जो लक्ष्य-प्राप्ति में मददगार बनता है।
ANALISE (विश्लेषण) अपने छोटे-छोटे लक्ष्य की पूर्ति के उपरांत उसका विश्लेषण करें कि इसमें क्या कमी रह गई है? इसको आगे और अच्छा कैसे किया जा सकता है, ताकि यह 100 प्रतिशत सही हो। गलतियों को किस तरह सुधार कर बेहतर किया जा सकता है।
आशय यह कि अपनी कार्यशैली की बेहतरी के लिए अपना विश्लेषण करना ना भूलें। यह तरीका आपके काम को न केवल बेहतर बनाएगा, अपितु आपको एक बेहतर इंसान बनाने में मददगार साबित होगा।
LEARN (नया सीखना) यह तय है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यह न सोचें कि अब तो मेरा समय निकल गया। अब क्यों और किसके लिए सीखूं? जबकि सीखा हुआ कभी बेकार नहीं जाता। यह हमेशा काम आता है।
हिंदी-भाषा को भली-भांति सीखें। नए-नए शब्द आत्मसात करें और उनका वाक्यों में प्रयोग व्याकरण के नियमों के अनुसार करें। यदि रुचिकर हो और समय व जेब साथ दे, तो कोई कला-कौशल भी सीखें। इससे आप तरोताजा रहेंगे, जो आपको सफल इंसान बनाने में सहायता करेंगे।
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