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लक्ष्य का निर्धारण::-वीरेंद्र देवांगना

लक्ष्य का निर्धारण::
लक्ष्य व्यक्तिपरक होती है। हर व्यक्ति की अलग-अलग। कोई जरूरी नहीं कि दो जुड़वा भाइयों का लक्ष्य एक-सा हो। उनका भी लक्ष्य जुदा हो सकता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह लक्ष्य का इस तरह निर्धारण करे कि उसे सफल होना ही है। फिर चाहे सफलता अल्पकालिक हो या दीर्धकालिक।
इसके लिए लक्ष्य का निर्धारण और उसका क्रियान्वयन काफी मायने रखता है। अमेरिकन मनोचिकित्सक एडविन लाके के अनुसार, लक्ष्य का निर्धारण SMART होना चाहिए, जिससे व्यक्ति के लिए सपने और हकीकत का भेद स्पष्ट हो जाए।
SPECIFIC (विशिष्ट) लक्ष्यों को उप-लक्ष्यों में विभाजित करना चाहिए, जो मध्यम और छोटा हो। फिर छोटे-छोटे लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए बड़े लक्ष्य को हासिल करना चाहिए। यही सफलता का रहस्य है।
हालांकि इसमें संभव है कि आजीविका चलाने के लिए लक्ष्य से अलग या विपरीत नौकरी या कोई अन्य कार्य करना पड़ रहा हो, लेकिन इसे मंजिल की ओर ले जाने के रास्ते के रूप में लीजिए, जो आपकी जीविका चलाकर आपको संभल प्रदान कर रहा है।
अतः कार्य को रास्ते की रुकावट नहीं साधन बनाइए और बाधाओं को पारकर अपना विशिष्ट लक्ष्य हासिल कर लेना चाहिए।
MEASURABLE (मापने या अंकन करने योग्य) लक्ष्य को मापनीय बनाना चाहिए। लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसके मापन की विधियां तैयार कीजिए कि लक्ष्य को हासिल कैसे करना है? उसकी रूपरेखा बनाइए। सूची तैयार कीजिए।
लक्ष्य के जो बिंदू हासिल हो गए हों, उन्हें सूची से काट दीजिए या हटा दीजिए, ताकि आपको लग सके कि आपने इतना लक्ष्य प्राप्त कर लिया है और इतना प्राप्त करना शेष है।
ACHIEVABLE (प्राप्त किए जा सकने योग्य) लक्ष्य प्रेरणादायी और प्राप्त करने योग्य होना चाहिए। वह ऐसा हो, जो आपको अल्सुबह झकझोरकर जगा सके। वह ऐसा हो, जो हरदम आपके जेहन में रहे। आपके सोते-जागते, उठते-बैठते वह आपका पीछा करे।
अर्थात, लक्ष्य के प्रति आपकी ऐसी दीवानगी हो, जो आपको कार्य करने के लिए प्रेरित करे। आपको उकसाए और कार्य करवाए। यह जीतना कठिन होगा, उतना आपको चुनौतीपूर्ण लगेगा। इसलिए ऐसे लक्ष्य बनाइए, जो कठिनाईभरा तो हो, लेकिन उसको मेहनत से हासिल किया जा सके।
REALISTIC (वास्तविक या यथार्थवादी) लक्ष्य वास्तविकता की कसौटी पर खरा उतरे। वह इतना यथार्थपूर्ण हो कि उसे आप वास्तविकता के धरातल पर उतार सकें। इसके लिए उस क्षेत्र के महानुभावों के प्रयासों का अवलोकन करें, तो पाएंगे कि उन्होंने किन मुश्किलों का सामना करते हुए चिन्हित लक्ष्य हासिल किया हुआ है। इससे आपको रास्ता मिलता चला जाएगा, जो आपको कामयाबी के करीब ले जाएगा।
TIME BOUND (समयबद्ध) लक्ष्य का समय निश्चित होना चाहिए कि इतने समय में यह हासिल होकर रहेगा। समय निर्धारण के उपरांत इसकी प्राप्ति में तुरंत जुट जाना भी चाहिए। यह निर्धारित समय-सीमा आपको कार्य करने के लिए बाध्य करेगा, जो आपको मंजिल तक पहुंचाने में अतीव सहायक होगी।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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