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लेखन की चुनौतीः भाग-2ःः पुनरुक्ति या द्विरुक्ति दोष-वीरेंदर देवांगना

लेखन की चुनौतीः भाग-2ःः
पुनरुक्ति या द्विरुक्ति दोषःः
वाक्य का संतुलन, सौंदर्य व माधुर्य बनाए रखने के लिए एक वाक्य में एकार्थ बोधक एक ही शब्द रखे जाने का नियम है। इसी तरह समान अर्थ ध्वनित होनेवाले शब्दों की पुनरुक्ति से भी यथासंभव बचा जाना चाहिए।
अन्यथा वाक्य का सौंदर्य नष्ट हो जाता है और वाक्य बोझिल जान पड़ता है। चुस्त वाक्य के निर्माण के लिए इस नियम का विशेष ख्याल रखा जाना चाहिए।
ये अव्यय शब्द हैं-केवल, सिर्फ, मात्र, एकमात्र, भर, तक, सा, ही, भी, महज, फखत इत्यादि।
बैंक चेक या विड्राल फार्म में किसी धन के भुगतान व जमा फार्म में लोग जाने-अनजाने ‘केवल सौ रुपया मात्र’ लिख देते हैं, जो व्याकरण के नियमों के विरूद्ध होता है।
आम आदमी या कम पढ़ा-लिखा इंसान ऐसा लिखता है, तो समझ में आता है कि वह भाषा का अध्येता नहीं है।
लेकिन लेखक, जो लेखन को अपना कर्म मानता है, ऐसा लिखता है, तो यह उसके लिए अक्षम्य दोष माना जाता है।
इसी तरह एक वाक्य है-यह किताब केवल उसे ही देना। यह भी द्विरुक्ति दोषपूर्ण वाक्य है। क्योंकि ‘केवल’ का अर्थ ‘ही’ होता है और ‘ही’ का अर्थ ‘केवल’। ऐसे वाक्य शब्दानुशासन के लिए अनुपयुक्त माने जाते हैं।
इसी तरह एक ही वाक्य में कहीं ‘ही’ और कहीं ‘भी’ का प्रयोग भाषाविज्ञान की दृष्टि से अशुद्ध है। कारण कि ‘ही’ का अर्थ जहां ‘केवल’ ध्वनित होता है, वहीं ‘भी’ का अर्थ ‘इसके अलावा या अतिरिक्त’।
इस संबंध में अकबर और बीरबल की एक कथा प्रसिद्ध है। एक बार अकबर और बीरबल एक गांव भ्रमण के लिए निकले। उन्हें तंबाकू के खेत में एक गघा दिखा, जो घांस खा रहा था। इसे देखकर अकबर ने बीरबल को छेड़ा,‘‘देखो, बीरबल! उस गधे को देखो। गधा ‘भी’ तंबाकू नहीं खाता।’’
बीरबल शौक से तंबाकू खाया करते थे। यह कथन उनके लिए चुभनेवाला था। उन्होंने पलटकर जवाब दिया,‘‘जहांपनाह, गधा ‘ही’ तंबाकू नहीं खाता।
यह सुनकर सम्राट की क्या दशा हुई होगी, यह तो वही जानें। लेकिन इस संवाद ने ‘भी’ और ‘ही’ के प्रायोगिक अंतर को सरलतम रीति से समझा दिया है।
इसी तरह केवल और सिर्फ, महज व फखत समानार्थी शब्द हैं। एक वाक्य में इन दोनों में-से किसी एक ही प्रयोग होगा।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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