Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

लेखन की चुनौतीः भाग-12 अंकों का खेल-वीरेंद्र देवांगना

लेखन की चुनौतीः भाग-12
अंकों का खेल
हिंदी में प्रयुक्त शाब्दिक अंक व्याकरण की दृष्टि से विशेषण होते हैं, लेकिन उनके मेल से बने अन्य शब्द या तो संज्ञा होंगे या फिर विशेषण।
जैसे एक को लीजिए-एक के रूप परिवर्तन से इक, इकन्नी, इक्कीस, इकचालिस, इकसठ, इकतारा, इकहरा और इकलौता-इकलौती शब्द बनते हैं।
इसी तरह दो के मेल से दोराहा, दोगुना, दोहरा, दोबारा, दोतरफा, दोतला, दोधारी, दोहराना, दोपहर आदि शब्दों का निर्माण हुआ है। दो कभी-कभी दु में बदलकर दुगुना, दुतला, दुतल्ला, दुरंगा, दुअन्नी, दुबारा, दुतरफा, दुपट्टा, दुपल्ला, दुधारी, दुसरी दुहराना जैसे देशी शब्दों का निर्माण करता है।
ऐसा ही, तीन ‘ति’ में बदल जाता है। तिकड़ी, तिराहा, तिकोन, तिकोना, तिक्की, तिबारा, तिरसठ, तिरासी आदि।
चार भी अपना रूप बदलकर ‘चै’ हो जाता है। जैसे-चैमासा, चैमास, चैराहा, चैगुना, चैतरफा, चैकड़ी, चैबंद, चैकोर, चैहद्दी, चैवांलिस, चैरासी, चैरसिया, चैसर, चैथी, चैथया आदि।
पांच का भी यही हाल है। उससे पचपन, पचरंगा, पंचमेल, पंचामृत, पंचानन, पंचांग, पंचमी, पचपढ़ी, पंचमढ़ी, पचराह, पचराही आदि शब्दों का गठन किया जाता है।
यही हाल छह का भी है। इससे छैमाही, छैमसी, छठ, छठी आदि शब्द बनते हैं।
अब सात को लें। सात से सतसई, सतरंगा, सतमासा, सप्तभुजा, सप्तमी, सप्तपदी, सप्तम, सातधार, सातवीं आदि शब्द बनते हैं।
आठ से अठन्नी, अठ्यासी, आठवीं आदि शब्दों का सृजन हुआ है।
नौ का भी यही हाल है। नौमसी, नौकर, नौकरी, नौलखा, नौरंग, नौवमी, नौसिखिया, नौजवान/नवजवान, आदि।
यद्यपि यह नियम केवल हिंदी के देशज शब्दों और अरबी-फारसी के शब्दों पर लागू होते हैं, तथापि संस्कृत के शब्दों पर जिसे तत्सम कहा जाता है, रूप-परिवर्तन का प्रभाव नहीं पड़ता।
जैसे-त्रिकोण, चतुष्कोण, पंचकोण, षष्ठकोण, सप्तकोण, अष्ठकोण, द्विसूत्री व त्रिसूत्री को लिजिए। ये शब्द संस्कृत के हैं। ये अपना रूप बदलकर तिकोन, चतुष्कोन, पंचकोन, षष्ठकोन, सप्तकोन, अष्ठाकोन, दुसुती, तिसूत्री नहीं होते।
–00–

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp