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लेखन की चुनौतीः भाग-4ःः ‘ई’ अंत वाले शब्दों का बहुवचन बनाते समय ‘इ’ करनाःः-वीरेंद्र देवांगना

लेखन की चुनौतीः भाग-4ःः
‘ई’ अंत वाले शब्दों का बहुवचन बनाते समय ‘इ’ करनाःः
जिन शब्दों का अंत बड़ी ‘ई’ से होता है, वे एकवचनी शब्द कहलाते हैं। उनका बहुवचन बनाने के लिए अंत की बड़ी ‘ई’ के स्थान पर छोटी ‘इ’ का प्रयोग करना पड़ता है, तभी वह बहुवचन का शुद्ध रूप ग्रहण करता है।
उदाहरण के तौर पर-पढ़ाई, लिखाई, सिलाई, भलाई, मलाई, कमाई, ढलाई, ऊंचाई इत्यादि को लें। ये सभी एकवचनी और बड़ी ‘ई’ अंत वाले शब्द हैं। इनका बहुवचन बनाने के लिए बड़ी ‘ई’ की जगह छोटी ‘इ’ का प्रयोग किया जाना चाहिए, तभी विशुद्ध बहुवचन शब्द का निर्माण होगा।
उपर्युक्त को हमें बहुवचन के रूप में इस तरह से लिखना चाहिए। पढ़ाइयां-पढ़ाइयों, लिखाइयां-लिखाइयों, सिलाइयां-सिलाइयों, भलाइयां-भलाइयों, मलाइयां-मलाइयों, कमाइयां-कमाइयों, ढलाइयां-ढलाइयों, ऊंचाइयां-ऊचाइयों।
पते की बात यह भी कि बहुवचनी शब्दों के दो रूप होते हैं। एक-विभक्ति रहित और दूसरा-विभक्ति सहित। उपर्युक्त में पहला रूप परिवर्तन विभक्ति रहित प्रयोग के निमित्त है, तो दूसरा विभक्ति सहित प्रयोग के लिए। यहां विभक्ति का आशय कारक-चिन्हों से है।
उपर्युक्त बहुवचनी शब्दों को विभक्ति-रहित व विभक्ति-सहित प्रयोग करके स्वयं देखिए, यह अंतर स्वमेव आंखों के सामने आ जाएगा और आप बहुवचनी शब्द-प्रयोग में निपुण होते चले जाएंगे।
इसी तरह दाई, खाई, कसाई, ईसाई व भाई को भी समझें। ये शब्द एकवचन हैं। इनका बहुवचन दाइयां-दाइयों, खाइयां-खाइयों, कसाइयां-कसाइयों, ईसाइयां-ईसाइयों, भाइयां-भाइयों बनेगा।
ऐसे ही शब्द हैं-विद्यार्थी, लाभार्थी, अर्थी, कर्मचारी, अधिकारी, सहेली, मैत्री, मंत्री, दर्जी, धोबी, नाई आदि-इत्यादि। इनका भी बहुवचन रूप लिखते समय अंत के बड़ी ‘ई’ को छोटी ‘इ’ करना चाहिए, तभी बहुवचन शब्द बनेगा।
यही नहीं, शहरी, महरी, गठरी, प्रहरी, ठेठरी, कुर्मी, देहरी, चुनरी, दीपावली, दीवाली, पहेली, जलेबी, देवरानी, जेठानी, महारानी, रानी, पटरानी, वादी, फरियादी जैसे सैकड़ोंझारों शब्द हैं।
शुद्ध शब्द-लेखन कोई बड़ी बात नहीं है। केवल ध्यान देने की जरूरत है। जरा-सा ध्यान रखा जाए और सावधानी बरती जाए, तो सहजता से शुद्ध लिखा जा सकता है। यह सही दिशा में अभ्यास की बात है। कहा भी गया है, करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत-जात है, सिल पर पड़त निशान।
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