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हिंदू कौन-रानू शाक्य

हिन्दू कौन है? ⁉️

हिंदू शब्द की उत्पत्ति किसने की और कब की ???

  👉 हिन्दू धर्म कोई धर्म नहीं है परंतु यह एक जीवन जीने की शैली है। ऐसा कहना मेरा नहीं है ये इस देश के सर्वोच्च न्यायलय का कहना है क्योंकि हिन्दू शब्द का वर्णन या प्रयोग न तो चारों वेदों ( ऋग्वेद , सामवेद , यजुर्वेद , अथर्ववेद ) ,श्रीमद् भागवत और 18 पुराणों में है और न ही कहीं 120 स्मृतियों में ही कहीं  मिलता है। 



  इस देश में सबसे पहले श्रमण धर्म हुआ करता था जिनको मिटाकर विदेशी ब्राह्मणों ने अपना धर्म स्थापित किया जिसको पहले ब्राह्मण धर्म कहा जाता था परंतु बाद में अन्य लोगों में जागरूकता आने पर पर पैंतरा बदलकर इनको सनातन धर्म कहना शुरू कर दिया।



  हिन्दू शब्द की वास्तविकता यह है कि जब मुगल आक्रमणकारियों ने हमारे देश को गुलाम बना लिया और यहाँ का शासक बन बैठा तब सिंधु नदी के इस तरफ रहनेवाले सभी लोगों को हिन्दू नाम से संम्बोधित करना शुरू कर दिया। 



 हिन्दू फारसी भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है - चोर , डाकू , गुलाम , काफिर , काला आदि।



  जो ब्राह्मण (RSS) सबसे ज्यादा आज हिन्दू - हिन्दू की रट लगाये हुए है ये 1922 के पहले अपने को हिन्दू नहीं मानता था और हिन्दू शब्द को एक गाली मानता था, यहाँ तक की आज भी ये ब्राह्मण दिल से अपने आपको हिन्दू नहीं मानते हैं।



अगर विश्वास न हो तो किसी ब्राह्मण से पूछ कर देख सकते की तुम कौन हो?

 जवाब मिलेगा मैं ब्राह्मण हूँ न कि हिन्दू?



  इस देश में जिस धर्म को आज हम हिन्दू धर्म के नाम से जानते हैं पहले ब्राह्मण धर्म के नाम से जाना जाता था और यही शब्द वेदों में भी वर्णित है।



  एक बात और सोचनें वाली है कि अगर ये लोग अपने आपको हिन्दू मानते तो क्या 1875 में दयानंद सरस्वती नामक ब्राह्मण आर्य समाज की स्थापना करते या फिर हिन्दू समाज की।



 यहाँ तक कि जब मुगलों द्वारा इस देश के हिंदुओं के ऊपर जब जजिया कर लगाया , तो ब्राह्मणों ने इस कर को यह कह कर मना कर दिया था कि मैं तो तुम्हारी तरह ही विदेशी हूँ और मैं ब्राह्मण हूँ कोई हिन्दू नहीं( हिन्दू शब्द इस देश के असली वाशिंदों के लिए प्रयुक्त किये गए थे)। 



  ब्राह्मणों का ये भी कहना था कि एक विदेशी दूसरे विदेशी से कैसे कर ले सकता है? हिंदुओं से कर लिया जाय, हम लोगों से नहीं क्योंकि मैं ब्राह्मण हूँ हिन्दू नहीं।



   इस बात को और आगे ले जाते हुए उनके दरबारों में न सिर्फ ये लोग मंत्री बन बैठे बल्कि अपने आपको हिन्दू कर( जजिया कर) से भी मुक्त करवा लिया।



  साथियों जब 1917 में रशिया में क्रांति हुई और ठीक उसी समय ब्रिटेन में भी प्रौढ़ मताधिकार का आंदोलन शुरू हुआ क्योंकि वहाँ लोकतंत्र तो था , लेकिन सभी लोगों को मत देने का अधिकार नहीं था। 



  इस आंदोलन के डर से यहाँ के ब्राह्मणों ने एक बार पुनः पैतरा बदला और अपने आपको हिन्दू नाम की चादर में लपेट लिया, क्योंकि ब्रिटेन में अगर प्रौढ़ मताधिकार लागू होता तो भारत में भी ये लागु होना ही था क्योंकि भारत पर तब ब्रिटेन का शासन था।  



 इनको दर था की अगर भारत में प्रौढ़ मताधिकार लागू होता है (जैसा की बाद में हुआ भी) तो सत्ता ब्राह्मणों के हाथ से छीनकर यहाँ के शूद्रों के हाथों में चली जाती, क्योंकि लोकतंत्र में तो सत्ता चुनने का हक़ जानता के पास होता है और इस देश की 85% जनता शुद्र थी।



 इसलिए शासन - सत्ता पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से इन ब्राह्मणवादियों ने सिर्फ हिन्दू हिन्दू चिल्लाना शुरू किया बल्कि 1922 में हिन्दू महासभा का गठन करके उसपर अपना कब्ज़ा भी जमा लिया जो आज भी निरंतर जारी है और अपने को पहली बार मजबूरी में हिन्दू कहलाना स्वीकार किया वो भी राजनितिक स्वार्थ सिद्धि के लिए तथा अपने को अल्पसंख्यक से बहुसंख्यक बनाने के लिए। 



यही नहीं ठीक इसके 3 साल बाद 27 सितम्बर 1925 को इन्होने मनुसमिर्ती के सिद्धान्तों को लागु करने के लिए एक ब्राह्मण, हेडगेवार ने एक नया ब्राह्मणी संगठन बनाया, जिनको हम RSS के नाम से जानते हैं। जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कभी कोई हिस्सा नहीं लिया और जिसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ एक था ।

इस देश में ब्राह्मणवाद स्थापित करना यानि वर्ण और जातिव्यवस्था को मजबूती से इस देश में पुनर्स्थापित करना, हिन्दू मुस्लिम दंगे करवाना और इन देश में आज़ादी के बाद भी धर्म के नाम की सत्ता स्थापित करना जिसमे वो आज़ादी के बाद से अब तक पूर्णतया सफल हैं क्योंकि हम इसके चल को समझ नहीं पते हैं और इलेक्शन के टाइम पर हिन्दू बनकर इनको जीत देते जो सत्ता पते ही पुनः हमें जातियों में बाँट देते हैं। 



 हम सबको पता होना चाहिए कि इस देश का 99 % मुसलमान कोई और नहीं बल्कि ब्राह्मणों के द्वारा सताया गया हिन्दू है जिन्होने ब्राह्मणवाद/उच-नीच से तंग आकर अपने आर्थिक और सामाजिक सम्मान पाने के लिए अपना धर्म त्याग किया था जो असल में  हमारे ही भाई हैं। 

ब्राह्मणवादी लोग हम लोगों को आपस में लड़ाने का काम कर रहे हैं। यह हम सब लोगों को आपस में समझना पड़ेगा।

इसलिए आज से हम सब मिलकर खाएं कि

1) धर्म के नाम पर ब्राह्मणों द्वारा फैलाये जानेवाले दंगे का कभी हिस्सेदार नहीं बनेंगे,

2) आज से ब्राह्मणवाद/ ब्राह्मण को मिटने के लिए संघर्ष शुरू करेंगे

3) ब्राह्मणों द्वारा दंगे फ़ैलाने की चेष्टा करने पर हमसब जाकर मुस्लमान भाइयों को ब्राह्मणों का घर दिखा देंगे की ढंग फैलानेवाले ब्राह्मण है हम सब नहीं।

4) मुस्लमान भाइयों के साथ मिलकर ब्राह्मणवाद/ब्राह्मण को मिटा देंगे और पहले इनको कश्मीर से विष्ठापित किया गया था अब इनको इस देश से विस्थापित कर इनको इनके गृहस्थं यूरेशिया पहुंच देंगे।

5) शोषित वर्ग के सभी जाति के लोग तथा इस देश में जन्मे परंतु आज अल्पसंख्यक के क्षद्म नाम से जाने जानेवाले हम सभी भाई आपस में मिलकर रहेंगे और मिलकर इस देश में संविधान लागु करने की जंग शुरू करेंगे जो हमें समता,स्वतंत्रता, बंधुत्व की शिक्षा देता है हमें अपने मौलिक अधिकार देता है उसकी प्राप्ति के लिए और मनुवाद को जार से उखार फेकने के लिए मिलकर संघर्ष करेंगे।

👉 क्योंकि इस देश का दुश्मन ब्राह्मण

👉 आपका दुश्मन ब्राह्मण

👉 मेरा दुश्मन ब्राह्मण

👉 हमारा दुश्मन ब्राह्मण

👉 देशद्रोही ब्राह्मण

👉 समाज द्रोही ब्राह्मण

👉 देश और समाज के विकाश का दुश्मन ब्राह्मण

👉 उच्च-नीच,छुवाछुत फैलानेवाला ब्राह्मण

👉 मनु समिर्ति/आतंकवादी शास्त्र लिखनेवला ब्राह्मण

👉 दुनियां में आतंकवाद/मनुवाद/👉RSS का जनक ब्राह्मण

👉दंगे भड़कानेवाला ब्राह्मण

👉हमें आपस में लड़नेवाला ब्राह्मण

👉समाज तोड़नेवाला ब्राह्मण

👉 राम, कृष्ण, हनुमान, दुर्गा, काली, शंकर आदि फर्जी भगवानों और देवी देवताओं को बनाने वाले ब्राह्मण

👉 वेद, पुराण, शास्त्र, भगवतगीता, रामायण आदि सैकड़ों काल्पनिक ग्रथों को लिखने वाले ब्राह्मण

👉 चोरी, हत्या और बलात्कार करने वाले 99%ब्राह्मण

तो चलो हम सब मिलकर कदम बढ़ाएं।

ब्राह्मण /ब्राह्मणवाद/आतंकवाद के जड़ को मिटायें

हम सब मिलकर अपना नया भारतवर्ष बनायें।

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