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जीवनसंगिनी (कृतज्ञता) एक सामाजिक कहानी-पूनम मिश्रा

मैं गांवपहुंचता हूं तो देखता हूं कि गांव में सब कुछ पहले जैसा ही है मेरा बचपन मेरे गांव में ही बीता मेरे माता पिता किसान थे हम दो भाई थे मैं सबसे बड़ा था मेरे माता पिता ने मुझे खेती करके पढ़ाया लिखाया मैंने भी अपनी पढ़ाई लिखाई में कोई कमी नहीं की बहुत मेहनत किया और एक बड़े पद पर नौकरी करने लगा मेरे माता-पिता को मुझ से बहुत उम्मीदें थी उन्होंने खेत गिरवी रखकर मुझे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए गांव से बाहर भेज दिया मैं उनकी आशा पर खरा उतरा लेकिन सभी जिम्मेदारियों को मैं पूरी तरह निर्वाह करता रहा कुछ समय पश्चात मेरी शादी हो गई मेरी पत्नी भी गांव की भोली भाली स्त्री थी और परिवार के सभी सदस्यों को लेकर चलने वाली मुझसे छोटा मेरा भाई जो कि सिर्फ मेरे ऊपर ही अभिमान करता था बचपन से ही उसका पढ़ाई लिखाई में बहुत मन नहीं लगता था मां-बाप हमेशा मुझसे कहते कि छोटू का ध्यान रखना बेटा मेरे ना रहने पर तू भी इसके सहारा हो क्या करें इसे तो इतना समझाते हैं फिर भी यह कुछ नहीं समझता छोटू जो की दौड़ के मेरे गले लग जाता कहता मेरा भाई अधिकारी है मुझे कुछ करने की क्या जरूरत मेरी हर आज्ञा का पालन करता मेरे हर सुख दुख में खड़ा रहता लेकिन अपना भविष्य नहीं बना पाया और ना ही कोई काम कर सका जब तक माता-पिता जिंदा थे खेती-बाड़ी से उसका परिवार चलता रहा परंतु माता-पिता के जाने के पश्चात उसकी 4 बेटियां दो बेटे हैं जिसकी जिम्मेदारी उस पर आ गई वह उन सब को पूरा करने में असमर्थ था धीरे-धीरे नशे का आदी हो गया लेकिन उसे आज भी मेरे ऊपर पूरा गुरूर था कि मेरा बड़ा भाई है वही मुझे देखेगा मुझे संभालेगा पूरे गांव में बड़े शान से बोलता कि मेरा भाई तो अधिकारी है इसलिए मुझे क्या पढ़ने लिखने की जरूरत है या मुझे कुछ भी करने की क्या जरूरत है मां-बाप जब तक है तब तक तो सब ठीक था परंतु माता-पिता के जाने के पश्चात मेरी पत्नी भी छोटे भाई के परिवार की देखभाल करने से धीरे-धीरे मुझे मना करती क्योंकि मेरी खुद की भी तो जिम्मेदारी थी मेरे एक बेटा एक बेटी है पत्नी बहुत चिल्लाती कि आप हर समय छोटू के लिए ही क्यों सोचते हैं अपना भी परिवार देखें परंतु गांव की सीधी-सादी महिला थी चीखने चिल्लाने के बावजूद भी जब भी छोटू की बेटियों की शादी पड़ती तो काफी सारा सामान लेकर गांव जाती पूरी जिम्मेदारी के साथ बड़ी मां की तरह पूरा काम करती धीरे-धीरे छोटू की 4 बेटियों की शादी हो गई सभी अपने ससुराल में रच बस गई मेरी पत्नी इस बात को अच्छी तरह से समझती थी की छोटू का मेरे सिवा कोई नहीं है इसलिए जितना उससे हो सकता था वह खुद भी मेरी मदद करती जो कि मेरे सुख-दुख में हमेशा मेरे साथ खड़ी रहती उसे भी पता था कि मेरे सिवा छोटू का कोई और नहीं है इसलिए बहुत बोलने के बावजूद भी वह मेरी ही बात मानती और मेरे हर कोशिश करती कि मैं हमेशा खुश रहूं उसकी वजह से हमें कोई परेशानी ना हो अपने बच्चों को भी शिक्षा देती कि पापा तुम्हारे बहुत अच्छे हैं वह अपने परिवार का बहुत ख्याल रखते हैं रखना भी चाहिए क्योंकि वही अपने परिवार के एक कमाऊ पूत है परंतु नियति को कोई कैसे टाल सकता है कुछ समय पश्चात कैंसर से मेरी पत्नी का निधन हो गया मैं इस समय रिटायर हो चुका हूं अपने बेटा एवं बहू के साथ रहता हूं उनके भी दो बच्चे हैं मेरी उम्र 65 साल हो चली है बेटा और बहू मेरे ऊपर दबाव डाल रहे हैं कि आप अपने हिस्से की संपत्ति गांव का भेज दीजिए सारा पैसा ले आइए हम सब विदेश जाकर सेटल होना चाहते हैं आप भी अब इंडिया में रह कर क्या करेंगे माता जी की मृत्यु हो चुकी है आप हम लोगों के साथ विदेश चलीए हां मेरा बेटा भी मेरा बहुत ख्याल रखता है वह मुझे अकेला नहीं छोड़ सकता इसलिए उसकी इच्छा है कि मैं गांव की सारी संपत्ति अपने हिस्से का बेच दूं और मैं पुनः उन सबों के साथ विदेश चला जाऊं मेरे बहुत मना करने पर भी मेरे बेटा बहू मुझसे जबरदस्ती करने लगे कि नहीं आप अपने हिस्से का जमीन बेच दीजिए जिंदगी भर आप छोटू चाचा का बोझ थोड़ी ना उठा सकते हैं अब कल ही जाइए और बे चाहिए मैं गांव में हूं जब मैं घर पहुंचा तो देखा छोटू चारपाई पर लेटा हुआ है उसकी स्थिति बहुत खराब है शराब पीने के कारण उसका लीवर खराब हो चुका है उसकी पत्नी मुझे देखकर दौड़ कर आती है मेरा पैर छूती है और मुझे देख कर खुश होती है कहती है भैया बैठे मैं आपके लिए चाय पानी लेकर आती हूं वह जितना हो सकता है मेरे लिए उचित भोजन की व्यवस्था करती है रात में चारपाई पर सो जाता हूं घर की स्थिति को देख करके मुझे अपने माता-पिता की याद आती है एक समय यही घर था जहां चारों तरफ अनाज लगे रहते थे मेरे पिताजी बहुत ही मेहनती किसान थे आज यह घर है कितनी खराब स्थिति मे मैं यही पला बड़ा बड़ा हुआ इसी घर से मैंने सपने सजाए और मैं अपने माता-पिता का आशीर्वाद देकर बाहर चला गयाहै मैं इतना संपन्न हो करके मेरा बेटा इंजीनियर मैं खुद अधिकारी पद से रिटायर हुआ हूं यहां आ कर के अपने हिस्से की जमीन बेचकर पैसा लेकर चला जाना चाहता हूं अंदर ही अंदर बहुत सोच रहा था मैं यह कैसे कर सकता हूं मेरी मां ने मुझे पढ़ा लिखा कि इसी योग्य बनाया था कि मैं हमेशा अपने परिवार का ख्याल रखु क्या परिवार में सिर्फ पति पत्नी और बच्चे ही आते हैं भाई भाई का परिवार नहीं आता मुझे रात भर नींद नहीं आई मुझे ऐसा लगता घर के आंगन में कि मां मेरे पास आकर कह रही है छोटू को संभाल लो बेटा छोटू तुम्हारी जिम्मेदारी है मैं सो नहीं पाया देखता रहा कभी मां मेरे पास आ रही है पिताजी कभी मेरे पास आ रहे ऐसा महसूस होता रहा वह मुझसे कुछ कह रहे हैं पूरी रात में बेचैनी में उलझा सुबह होने पर देखा कि छोटू की पत्नी मेरे लिए चाय लेकर खड़ी थी बोली भैया आप चाय पी लीजिए नहा धो लीजिए तो मैं आपके लिए पराठा सब्जी बना देती हूं मैंने ध्यान से देखा कि छोटू की पत्नी बहुत ही दुबली पतली हाथ में 1 चूड़ी पड़ी है किसी तरीके से अपने आप को समेट के रखी हुई थी मुझे देखकर बहुत दया आई स्थिति हमारे भाई की परिवार की बहुत खराब है उसके दो छोटे बच्चे जो कि अभी बहुत छोटे थे मेरे पास आकर बैठ गए पापा पापा के गले लग गए मैंने देखा कि दोनों बहुत ही गंदे कपड़े में थे स्कूल नहीं जाते थे पूछने पर पता चला कि पैसा ना होने की वजह से पापा ने उन सबों का नाम कटवा दिया मैंने छोटू को बहुत समझाया बात किय कि तुम ऐसा क्यों करते हो अपने आप को सुधारो वह तो फिर वही रट लगाए बैठा था आप है ना भैया मुझे किसी चीज की कमी नहीं है आप आ गए हैं सब ठीक हो जाएगा फिर जिसका भाई अधिकारी है उसे कुछ काम करने की क्या जरूरत है भैया जब तक आप हैं मुझे किसी चीज की कमी नहीं होने देंगे मैं तो समझा समझा कर थक चुका था माता-पिता भी उसे समझा कर थक चुके थे परंतु गलत संगत में पडकर अपने आप को पूरी तरह खराब कर दिया था हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था यह कहने की मैं यहां अपने हिस्से की जमीन बेचने आया हूं कहो भी तो कैसे कहूं मैं उठा और थोड़ा खेत देखने के लिए बाहर निकल गया मैं खेत से होते हुए जा रहा था कि मैंने देखा कि छोटू को कुछ गांव वाले से बात कर रहे थे और कह रहे थे अब बताओ छोटू बहुत अपने अधिकारी भाई पर गुमान था ना देखो अपने हिस्से की जमीन बेचने वह गांव आया है इतने समय के बाद वह क्यों आया है सोचो अब तुम्हारी क्या हालत होगी मगर वह शराब के नशे में चूर कह रहा था नहीं मेरा भाई ऐसा नहीं है वह मुझे संभाल ने आया है वह मुझे देखने आया है मेरा भाई बहुत बड़ा अधिकारी है वह मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकता है क्योंकि वह मेरा भाई है तुम लोग झूठ बोल रहे हो शायद गांव में लोगों को मेरा आना एक चर्चा का विषय था मैं यह सब सुनकर के आगे बढ़ गया मन ही मन सोचने लगासोचा कि कुछ लोगों से बात करके आज ही खेत बेच दूंगा कल मैं वापस चला जाऊंगा मेरी कल की टिकट थी मैं मैं कुछ दूर तक यूं ही खेत देखते हुए चलता रहा तभी कुछ गांव वाले मुझे मिले और कहने लगेगआपका भाई तो आपके ऊपर बहुत गुरूर करता है बहुत अभिमान करता है भाई हो तो आप जैसा परंतु इसकी स्थिति आजकल बहुत खराब है देखिए ना इसके घर की हालत क्या हो गई है अच्छा हुआ जो आप इस मुसीबत के वक्त इसके पास आ गए सुनते हैं उसकी पत्नी की तबीयत बहुत खराब रहती है फिर भी बेचारी किसी तरीके से अपना जीवन यापन कर रही है आपके आ जाने से वह बहुत खुश है पूरे गांव में घूम घूम के कह रहा है कि मेरा भाई आया है मेरा भाई आया है अब मैं फिर से पहले जैसा हो जाऊंगा मैं चुपचाप सुन कर आगे बढ़ गया क्योंकि मैं बहुत दिनों के बाद गांव आया हूं पत्नी के निधन के बाद मैं पूरी तरह टूट चुका हूं बहू बेटा के दबाव में मैं यहां की अपने हिस्से की जमीन बेचने का व्यवस्था में लगा हुआ था लेकिन अंदर ही अंदर मुझे बहुत घुटन सा महसूस होता चला जा रहा थाक्योंकि मैं बहुत दिनों के बाद गांव आया था पत्नी के निधन के बाद मैं खुद टूट चुका था बहू बेटे के दबाव पर मैं गांव पहुंचा हूं मैं पुनः घर वापस लौट कर जाता हूं हिम्मत नहीं होती है कि कुछ मैं अपने भाई के परिवार के लोगों से कुछ कह सकूं इसी उहापोह में दूसरी रात भी बीत जाती है तभी मैं सुबह उठता हूं तो अपनी पत्नी के कमरे में जाता हूं मेरा गांव में खुद एक कमरा था जो हमेशा से बंद रहता हैमैं चाबी निकालता हूं और अपने कमरे में जाता हूं देखता हूं मेरी पत्नी का वह अलमीरा खोलता हूं जिसमें वह अपने शादी की कपड़ों को बहुत संभाल के रखी थी पास में कुछ बक्से पड़े थे जिसमें भी कुछ कपड़े थे मै एक-एक करके उसका बक्सा देखने लगता हूं तभी अचानक से उसकी एक साड़ी से एक कागज गिरता है पासबुक जैसा मैं उसे उठाता हूं तो देखता हूं कि अरे इस पासबुक में इतना पैसा जमा है लगभग उतना जितना मेरे हिस्से में जमीन बेचने पर पैसा मुझे मिलता देखता हूं इसका समय भी पूरा हो चुका है यह मेरी पत्नी ने अपने और मेरे नाम से पासबुक में पैसा जमा करती थी जब भी वह गांव आती तो अपने मायके जाती तो हमेशा कुछ न कुछ पैसे ले जाती उसकी बचत करने की बहुत आदत थी वह हमेशा कुछ न कुछ सेविंग करती रहती थी मुझे पता नहीं चलता गाहे-बगाहे वह मेरी मदद करती मैंने देखा की पासबुक में उसके पैसे ऐसे ही पड़े हैं मैं पासबुक उठाता हूं तुरंत गांव की डाकघर में पहुंचता हूं वहां जाकर के पैसे निकालता हूं और अपने बेटे को फोन करता हूं कि बेटा मैंने जमीन अपने हिस्से की बेच दी मैं कल दिल्ली वापस आ रहा हूं सब पैसा लेकर के बेटा मेरा बहुत खुश होता है बोलता है पिताजी आपने यह बहुत अच्छा काम किया यह तो आपको बहुत पहले ही कर देना चाहिए था मैं घर आता हूं बहुत खुश रहता हूं अपने भाई की पत्नी से बोलता हूं सुधा आज तुम हर तरह की खाना बनाओ कड़ी पकौड़ी चावल सब्जी खीर मैं तुम्हें पैसा देता हूं तुम खूब अच्छे से खाना बनाओ अपने आप को अच्छे से रखो क्योंकि यहां पर जितना सब कुछ है सब तुम्हारा है मैंने गांव के ही एक किसान से बात की है वह आधी पर खेती करेंगे और तुम्हें अच्छे से उसका अनाज मिलेगा और मैंने दोनों बच्चों का एडमिशन करा दिया है कल से इन दोनों को स्कूल भेजना और मैं तुम्हारे नाम से एक अकाउंट खुलवा दिया हूं बेटा जब भी तुम्हें जरूरत हो मैं उसमें पैसे डालता रहूंगा हमेशा अपने बच्चों को पढ़ाओ उसे योग्य बनाओ जो छोटू न कर सका इन बच्चों को करने दो किसी भी तरह की कोई जरूरत हो मुझसे जरूर संपर्क करना सुधा बहुत खुश हो जाती है मुझे आज ऐसी ही खुशी हो रही थी जैसी जब मेरी नौकरी लगी तब मेरी मां को हुई होगी मां ने घर पर अगल-बगल के लोगों को बुलाकर गाना गवाया खूब स्वादिष्ट व्यंजन बनवाए लोगों में मिठाई बांटी क्योंकि मेरी जॉब लगी थी मैं अधिकारी बना था मुझे उसी तरह की खुशी आज हो रही थी कि मेरी पत्नी जाते-जाते भी जीवनसंगिनी का धर्म निभा गई मुझे इतना पैसा मिल गया कि मुझे अपना जमीन बेचना भी नहीं पड़ा और मैं अपने भाई की पूरी तरह से मदद कर सका और मेरा बेटा भी खुश मैं भी खुश मेरा भाई का परिवार भी खुश मैं सबको खुश देखना चाहता था मेरी पत्नी आज भी जाते-जाते मेरे ऊपर बहुत बड़ी कृपा कर गई मैं उसे याद करके आंखें नम हो गई फिर मैं सुधा से बोला आज घर में खीर बनाना और खूब खुश रहो क्योंकि मैं कल दिल्ली चला जाऊंगा दूसरे दिन मेरी ट्रेन की टिकट थी मैं अपने गांव से दिल्ली के लिए चल पड़ा मन में एक सुकून था कि मैं अपने भाई के लिए कुछ कर सका साथ हीअपनी पत्नी के प्रति कृतज्ञ था जिसने मुझे इस मुसीबत से बाहर निकाला जो मैं अपने परिवार के लिए करना चाहता था मैं आज बहुत ही सुकून महसूस कर रहा हूं

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Poonam Mishra

Poonam Mishra

Main Poonam Mishra उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से हूं मैंने इतिहास से m.a. एवं b.Ed किया है एवं मुझे ड्राइंग में भी रूचि है मुंबई आर्ट का कोर्स किया है इसके अलावा मुझे कविता कहानी गजल शायरी पढ़ने एवं लिखने का शौक है मैं खुद का कोचिंग इंस्टिट्यूट चलाती हूं किड्स कोचिंग के नाम से मैं बच्चों को पढ़ाती हूं

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