Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

खुशबु की महक – पूजा कुमारी

फुलो की खुशबु मै ना जाने यह कैसा एहसास होने
लगता हैं| लगता है दिन ओर रात दोनो का एहसास
यह खुशबु मै ही होता हैं|
बर्षा हो या पत्थर गिरे यह खुशबु का एहसास नही
रूकता हैं| पत्झर का इकरार होने लगता हैं|
फुलो मै सुगंध है खुशबु मै एहसास जिदंगी है या नही|
यह किसी को पता नही पर यह खुशबु का एहसास
जरूर रहता हैं|
प्यार के बंधन मै जब यह खुशबु का एहसास होता हैं|
तो नजरिसा बदल जाते है पर यह खुशबु का महक नही|
खुशबु एक ऐसा सुंगध हैं| जिससे माँ अपनी बच्चो
को पहचान लेते है कि हमारे बच्चो की खुशबु हैं|
महक खुशबु के समान होते है| जिससे जिदंगी
छोडंकर भी यह समझ नही पाते है| आखिर यह
एहसास क्यो होता हैं|
खुदा अपनी भक्त पर यह खुशबु का एहसास करता
है| नजरिया सब बदल लेते है पर यह खुशबु का महक नही| बस हर तरफ खुशबु का एहसास ही रहता हैं|

Pooja Kumariपूजा कुमारी
समस्तीपुर बिहार

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp