माता पिता का प्यार – दिशा शाह

माता पिता का प्यार – दिशा शाह

एक माता पिता अपने बचे को अछि परवरिस देते है, कोई दिक्कते ना आये अपने बचे पर, अच्छा संस्कार , लालन पोषण करते है. एक माँ अपने बचे को स्नेह , ढेर सारा लाढ प्यार करती है .एक माँ के लिए अपना बचा कितना भी बढा ना हो जाए एक माँ के लिए उसका बचा हमेशा बचा ही रहेता है . अपने बचे को थोड़ा सा भी लेट हो आने में बचा कितना भी बड़ा हो माँ को जहा तक उसके सामने ना आ जाए वहा तक तसली नहीं रहतीं . एक माँ ही हमेशा सुख में दुःख में हमेशा बचे के साथ देती . जगत में माँ जैसा प्यार करने वाला कोई नहीं मिलेगा . जब तबीअत खराब हो माँ हमेशा बचे के सर पर हाथ देती है . देखभाल करती जहा तक ठीक ना हो जाए बचे के पास में ही रहती है . बचा बुखा हो खुद नहीं खाती पहले बचे को खिलाती है. एक माँ के लिए अपने बचे पर स्नेह कभी नषट नहीं होता हमेशा अमर रहता है . एक पिता अपने बचे को बोहोत प्यार करते है , एक पिता अपना बचा को पढ़ाना चाहते है, अछि शिक्षा देना चाहते है की आगे जा के कोई मुसीबत न आये अपने पैर पर खड़ा हो सके . एक पिता हमेशा अपने बचे को अच्छे के लिए बोलते है. उसका कर्रिएर अच्छा हो सही सलाह देते है . पिता से अच्छा सला कोई नहि दे सकता , अपने बचे के लिए . एक पिता को बस अपने बचे आगे बढ़े , नाम रोशन करे यही चाहिए होता पिता को .
और पिता खुद के लिए नहीं खरीदते अच्छा कपड़ा हाजिर खाना जो बोलो सब हाजिर कर देते है. भले बजट कम हो फिर भी सब ख्वाइस पूरी करते है पिता . खुद के बारे में सोचते भी नहीं पहले बचे के बारे में सोचते है .जैसे माता पिता अपने बचे को अछि परवरिस देते वैसे आने वाले कल में बचे अपने माता पिता के आने वाले कल में , अछि देखभाल माता पिता को खुश रखे कोई कमि न हो ,अपने माता पिता को .माता पिता ही हमेसा सुख दुःख में साथ देते है हमे भी माता पिता के आने वाले सुख और दुःख में साथ देना होता है . हर मुसीबत में माता पिता का साथ देना अपने कर्त्तव्य का पालन करना वो ही आदर्श संतान कहलाता है/कहलाती है .

Disha shahदिशा शाह
सारणी लिलुआह, कोलकाता

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