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प्यार….1-चौहान-संगीता-देयप्रकाश

आज के वक़्त में बहुत प्रचलित शब्दों में से एक है” प्यार”. क्या इसका सही अर्थ पता है हमें? इसका जवाब देना ज़रा मुश्किल है.शायद इसका कोई सटीक परिभाषा भी नहीं, सभी के नजरिए अलग है इसे देखने का और किसका कितना सही और किसका कितना ग़लत ये निश्चित करना भी सही नहीं होगा. मैं भी सिर्फ़ अपनी सोच अपने नजरिए से प्यार का सा मतलब बताना चाहती हूँ l
अगर बहुत ही सादगी से कहूँ कि प्यार क्या है मेरे लिए तो बस यही कहूँगी मेरे जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा या मेरा पूरा जीवन कह लीजिए l बहुत वक़्त लगा मुझे भी ये समझने में की प्यार है क्या?
मेरे जीवन का एक दौर था जब मुझे किसी ने शादी का प्रस्ताव दिया और देखते ही देखते उसकी तरफ मेरा रुझान बढ़ गया जैसा कि अक्सर 17-18 वर्ष की उम्र में होता है और मेरे लिए प्यार की आखिरी मंजिल शादी निश्चित हो गयी l 4-5 साल बीते और धीरे-धीरे सब बदलने लगाl ना कोई प्यार रहा और ना ही शादी का जुनून l मुझे भी उस से बहुत शिकायतें हो गयी और अंततः सब खत्म हो गया और उसकी शादी कहीं और हो गयी l अब शिकायतों तक तो ठीक था सब मगर उसका मुझे छोड़ किसी शादी करना मेरे बर्दास्त के बाहर था क्योंकि मेरे लिए उससे शादी करना ही प्यार था और चाहे जैसा भी रिश्ता हो उससे मगर मैं निभाना चाहती थीl मगर उसका इस तरह मुझे अकेला छोड़ जाना मुझे ये सोचने पर बेवस कर गया कि ये कैसा प्यार था जिसमें झूठी कसमें खाई गयी झूठे वादे किये गये, शिकायतें तो होती ही है मगर इस तरह मुझे उसका छोड़ जाना ये दिखाता है कि ये प्यार नहीं थाl मतलब का रिश्ता था जरूरत खत्म होते ही खत्म हो गया, मगर ये समझने में बहुत वक़्त लगा मुझे शायद 1 साल l तब तक तो मैं भी औरों की तरह यही विश्लेषण करती रही कि पहले क्या था? अब क्या हो गया?क्यों बदल गया?शायद मेरी ही गलती थी, मुझे झुकना चाहिए था,उसको थोड़ा और समझाना था…….अरे यार कुछ भी कर लो, कह लो, वो नहीं रुकता क्योंकि उसको कोई प्यार था ही नहीं l अगर होता तो ना कुछ कहना पड़ता ना समझाना पड़ता क्योंकि प्यार में भावनाएं प्रधान होती है l
शिकायतें हज़ार हो मगर प्यार कभी खत्म नहीं होता l
मैंने उसे रोकने के लिए उसके पैर भी पकड़े मगर वो नहीं रुका आज सोचती हूँ क्या था वो सब? क्या प्यार में इंसान का अपना स्वाभिमान भी खो देना सही है? नहीं शायद मेरी तरफ से भी कोई प्यार नहीं था सिर्फ एक जिद थी l
जिद उससे शादी की, जिद उसके वादे ना निभाने की और सबसे बड़ी जिद ये कि आखिर कोई मुझे कैसे छोड़ गया मैंने क्या कुछ नहीं किया इसके लिए और ये मुझे छोड़ दे ये कैसे होगा l मतलब यही की मैंने भी जो कुछ किया उसके लिए उसका वो एहसास माने और मुझे छोड़ कर ना जाए जिंदगी भर उस एहसास का बदला मुझे I love you बोल कर चुकता रहे l क्या फर्क़ पड़ता है प्यार रहे या ना रहे बस वो मेरे साथ रहे मुझे झेलता रहे क्योंकि मैंने बहुत कुछ किया है न उसके लिए l उसके जाते ही ये प्यार मेरा गुस्सा में बदल गया और धीरे-धीरे नफरत में…औरआज का हाल ऐसा है कि मुझे उसको याद करना पड़ता है क्योंकि भूल गयी सबकुछ .मगर ये सब इतना आसान नहीं था मेरे लिए, बहुत कुछ खोया है इस सफर में मैंने.ना जाने कितनी रातें ना सोयी ये सब बताना बहुत मुश्किल है l मगर शायद मेरे जीवन में प्यार को बहुत गहरायी से समझना लिखा है इसलिए मेरी मुलाकात एक बार फिर हुई प्यार से या यूँ कहें कि पहली बार परिचय हुआ प्यार का और मेरी जिंदगी बस यही ठहर सी गयी है lयही तो दुविधा है कि प्यार और आकर्षण का फर्क़ समझ ही नहीं आता l

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