Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

सब अपनी ही दुनिया में है- भूमिका जोशी

आज हम ही जो आत्महत्या का कारण है, क्योंकि आज हमको हमारे पैसौं व तरक्की से मतलब है, हम हर समय काम काम करते रहते हैं, यहॉ कफी लोग काम के चक्कर में अपने परिवार तक से दूर हो जाते है, और अगर इनसे पूछो की परिवार से दूर क्यों हो तो इनका जवाब आता है कि अगर पैसे नहीं होगे तो घर कैसे चलेगा ,बिल्कुल सही जिंदगी में पैसे की बड़ी अहमियत है मतलब लोगों को लगता है पैसाें के बिना जिंदगी हो ही नहीं सकती, आज इंसानों को पैसों से इतना लगाव है कि वो अपने मॉ- बाप को भी अपने से अलग कर देते है, जब लड़का बड़ा हो जाता है वो अपने मॉ बाप व छोटे भाई के साथ नहीं रहना चहता और वो बोल देता है कि मुझे मेरा हिस्सा दे दो और ऐसा होने के बाद वो सोचता है कि अब वो सारी खुशियॉ उन पैसों से खरीद लेगा .कितना बेवकूफ़ है वो इंसान जो ये सोचता है कि दुनिया में खुशी परिवार के साथ नहीं बल्कि पैसों के साथ है. अगर मैं अपने अनुभव से बताऊ तो यार पैसों के लिए आपको अपने भी छोड़ देते है .मतलब ऐसी जिंदगी हो जाती है कि तुम बटवारे में पेड़ तक गिन लेते हो की मेरे छोटे भाई के पास गिनती के कितने पेड़ है और क्या पता मुझ से ज़्यादे तो नहीं वरना उसका फायदा हो जाएगा….

70 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype

Leave a Reply