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समझो मगर दिल से-चौहान-संगीता देयप्रकाश

ना जाने क्यों?
मगर अच्छा लगता है
जिक्र तुम्हारा खुद से बार बार करना
बीते पलों का दीदार करना
तुमसे मिलने की चेष्टा बार बार करना
इस दिल पर तुम्हारा इख्तियार करना
ना जाने क्यों?मगर अच्छा लगता है।।।

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Chauhan-Sangita-Deoprakash

Chauhan-Sangita-Deoprakash

मैं कोई कवयित्री नहीं हूँ सिर्फ अपनी भावनाएं पन्नों पर उतरने की कोशिश करती हूँ l मैं उन विषयों पर नहीं लिख सकती जिसे मैंने महसूस ही नहीं किया हो l मैं अमृता प्रीतम की निजी जिंदगी से अत्याधिक प्रेरित हूँ l

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प्यार….1-चौहान-संगीता-देयप्रकाश

आज के वक़्त में बहुत प्रचलित शब्दों में से एक है” प्यार”. क्या इसका सही अर्थ पता है हमें? इसका जवाब देना ज़रा मुश्किल है.शायद

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