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सच का महत्व-पूनम मिश्रा

लगभग सभी ग्रंथ हमें सच्चाई की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं मगर हम में से बहुत ही ऐसे लोग हैं जो जीवन के एक मोड़ पर ऐसा महसूस करते हैं कि सच बोलने से जीवन में आगे नहीं बढ़ा जा सकता अगर मैं सच्चाई का पालन जीवन भर करता रहूंगा तो शायद मैं जिंदगी में उतना सफल नहीं हो पाऊंगा जितना कि जो लोग झूठ बोलते हैं वह सच बोलने वाले से बेहतर जिंदगी जीते हैं ऐसा वह सोचने लगते हैं जबकि उनकी यह सोच सर्वथा गलत है यदि हमें जिंदगी के मकसद तक पहुंचना है तो हमें हमेशा अपने जीवन में सच के साथ जीना चाहिए गुरु वाणी में भी कहा गया है आदि सचु जुगादि सचु है भी सच नानक होसी भी सच यह सच क्या है उसे आज हम जानते हैं क्योंकि जैसा गुरु वाणी में कहते हैं जो सच है सृष्टी के अवतार में भी सच है आज भी सच है और आगे भी सच है और सच रहेगा यदि हम उस सच्चाई को जान जाए तो हमारी जिंदगी कई गुना ज्यादा बेहतर सफल हो सकती है बहुत पुरानी बात है किसी राज्य में एक चोर बहुत चोरी करता था उसे चोरी के अलावा और कोई कार्य नहीं आता था वह हर दिन कुछ ना कुछ चोरी करता था एक दिन उसने बहुत ढेर सारा सामान चोरी किया उस दिन वह बहुत खुश था उस दिन उसने सोचा कि आज मैं इससे भी बड़ा हाथ साफ करूंगा जब वह सड़क पर निकला तो देखता है कि एक जगह बहुत भीड़ लगी हुई है वहां पर एक संत प्रवचन दे रहे हैं लोगों को सच बोलने की प्रेरणा दे रहे हैं चोर के मन में आता है कि वह जाकर उनसे कहे कि मैंने जीवन भर चोरी की है आज मैं इस सच को स्वीकार करता हूं क्या मेरा भी उद्धार हो सकता है यह सोचकर वह संत के पास जाता है और कहता है मुझे भी सच्चाई के मार्ग पर चलना है क्या आप मेरी मदद करेंगे संत पूछते हैं कि आप क्या कार्य करते हैं तब चोर कहता है महाराज मैं चोरी करता हूं संत महात्मा बोलते हैं ठीक है आज से तुम सच्चाई की राह पर चलो सभी से सच बोलो झूठ कभी मत बोलो तुम्हारा अपने आप द्वार हो जाएगा चोर बोलता है मैं कोई और कार्य तो नहीं कर सकता क्योंकि मुझे सिर्फ चोरी करना ही आता है अब मैं आपके बताए हुए मार्ग का अनुसरण करूंगा 1 दिन चोर एक सेठ के घर जाता है और सेठ के दरबार से बोलता है आज मैं दुकान में चोरी करूंगा दरबार हंस देता है बोलता है कोई चोर चोरी करना है यह बताता थोड़ी ना है और वह उसे अंदर जाने देता है चोर अंदर जाता है तिजोरी खोलता है और लेकर बाहर जाने लगता है दरबार बोलता है यह क्या कर रहे हो तो वह बोलता है कि मैंने कहा था ना कि मैं आज चोरी करूंगा तो मैं चोरी करके जा रहा हूं दरबार हंस देता है कुछ समय बाद सेठ आता है देखता है कि दुकान में चोरी हो गई है तो दरबान से पूछता है कि कौन सामान ले गया तब दरबार उस व्यक्तिके बारे में बताता है वह उसे ढूंढ ने के लिए कहता है दरबान उस व्यक्ति को ढूंढ कर लाता है तब सेठ बोलता है कि तुमने चोरी की चोर बोलता है कि हां सेठ मैंने आपके यहां चोरी की है मैंने इसकी सूचना आपके दरबान को दे दी थी सेट बहुत खुश हो जाता है बोलता है आज से तुम्हें चोरी करने की जरूरत नहीं है आज से तुम मेरे दुकान में काम करोगे और पैसा कमाओगे जो व्यक्ति सच बोल कर के चोरी कर रहा है वह चोर हो ही नहीं सकता है इस प्रकार वह चोर बहुत खुश हो जाता है सच्चाई की राह पर चलने के कारण उसे एक अच्छा काम भी मिल जाता हैकुछ समय पश्चात वह संत के पास जाता है और उनके चरणों में अपना सर रख देता है और कहता है आपके आशीर्वाद से मेरा उद्धार हो गया अब मुझे चोरी करने की जरूरत नहीं पड़ती अब मैं मेहनत की कमाई खाता हूं सच बोलने के कारण ही आज मुझे यह दिन देखने को मिला है

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