विचार- दिव्यानि पाठक

विचार- दिव्यानि पाठक

कोई लकड़ी का स्तंभ नहीं जिस पर की कठोर आरी चलती हैं।
ये जिंदगी हैं जो सहायता के आधार पर चलती हैं।

 

Divyani Pathak

 

दिव्यानि पाठक

सीहोर,मध्य परदेश 

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