व्रत (उपवास) – अनिल कुमार सागर

व्रत (उपवास) – अनिल कुमार सागर

मित्र के साथ नाश्ता करने होटल पहुंचा तो देखा एक व्यक्ति नौकर को गालियाँ दे रहा था। बाद में ज्ञान हुआ कि उस व्यक्ति का उपवास चल रहा है! नौकर चाय लेकर गया तो चाय ठंडी हो गई थी!अतः वह गरम हो रहे थे! मित्र बोले ” ऐसे व्रत से क्या लाभ? जब वाणी पर ही संयम नहीं तो शेष इन्द्रियां क्या वश में रहें गी?किसी गरीब का दिल दुखाना से बढ़कर पाप तो विश्व में नहीं है

अनिल कुमार सागर
संभल (उत्तर प्रदेश)

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