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नशा (नाश शरीर का अर्थार्त मौत ) – सुरेश कुमार वर्मा

एक बार एक महात्मा जी थे। वे हर रोज तालाब में स्नान करने जाते, तब रास्ते मे एक शराबी उन्हें हर रोज प्रणाम करता। लेकिन महाराज जी उसके प्रणाम का कोई जवाब दिए बिना ही अपने आश्रम की और चले जाते।
एक दिन वह शराबी माहत्मा जी का रास्ता रोक के खड़ा हो गया और महात्मा जी से कहा, माहत्मा जी-आप सभी के प्रणाम का जवाब देते हैं, लेकिन मेरे प्रणाम का जवाब क्यो नही देते?
माहत्मा जी ने कहा–तुम शराबी हो, मदिरा पीते हो,नशा करते हो, इसलिये मै तुम्हे कोई जवाब नहीं देता, क्योंकि यह मेरे धर्म के खिलाफ हैं।
तब शराबी कहता हैं- गुरु जी,जिसे आप शराब कहते हैं, वह तो गुड़ का जूस हैं और जूस पीना गलत हैं क्या?
अब महात्मा जी बोले-वत्स मान लो, मैं तुम्हें मुठी भर मिटी फेंक कर मारू या मात्र 1 कप पानी फेंक कर मारू। क्या तुम्हें चोट लगेगी। उस शराबी ने कहा- नहीं,मुझे कोई चोट नही लगेगी और न ही कोई और नुकशान होगा।
अब माहत्मा जी ने कहा– अगर मिट्टि और पानी को मिला कर, उसे सूखा कर आपको मारे तो क्या होगा। शराबी ने कहा- अब अवश्य ही मुझे चोट लगेगी।
माहत्मा जी बोले-गुड़ जब तब नुकशान नही करता जब तक वह गुड़ हैं। जब गुड़ को पानी मे मिलाकर, आंच पर उबालकर जो जूस तैयार होता हैं, वह बहुत ही नुक्सान करता हैं।
अब शराबी को समझ मे आ गया कि नशा किस तरह नुक्सान करता हैं।और उसने जिंदगी में कभी नशा न करने की कसम खाई।

सुरेश कुमार वर्मा
हिसार (हरियाणा)

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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