पहला कदम-पिंकू कुमार

पहला कदम-पिंकू कुमार

ना जाने क्यों ना चाहकर भी हम सामाजिक
कुरीतियाँ बार -बार करते है
जहाँ लिखा है मूत्र त्याग मना है
वहीं पेशाब करते हैं
अपनी बहन की शादी हो रही हो तो
दहेज प्रथा को पाप की संज्ञा देते है
जब अपनी शादी हो रही हो तो
हम दहेज के प्यासे हो जाते है
चलचित्रों मे प्रेम कहानी अच्छी लगती है
वास्तविकता हमसे अच्छा कौन जानता है
दूसरो के घर मे सास -बहू का झगड़ा
फिर अलग – अलग बखरा हमे ना भाता
फिर भी यही हम भी निभाते है ।
ना जाने क्यों ना चाहकर भी हम इसे करते है।

 पिंकू कुमार

        चमपारण, बिहार

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