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परिवार – दिशा शाह

Disha shahपरिवार दो तरह का होता है एक होता है एकल परिवार हो जिसमें दादा दादी माता , पिता , और बेटा , बेटी रहते है. और दुसरा होता है सयुक्त /जॉइंट फॅमिली .जिसमें दादा दादी , माता , पिता , बेटा , बेटी , चाचा , चाची के बीटा , बेटी रहते है . परिवार में बड़े बुजुर्ग माता पिता को मान सन्मान आदर देते है . माता पिता के जाने के बाद भाई भाभी माता पिता का दर्जा देते हे .बड़े भाई भाभी माँ बाप की कमी पूरी करने की कोसिस करते है . हमेशा परिवार में भाभी माँ सन्मान होती है. भाभी को मान सन्मान आदर ,और भाई पिता जैसे आदर सन्मान देना होता है .चाहे कोई भी परिवार हो सबसे पहले परिवार में बड़ो की छोटो की इज्जत करनी होती है . बड़ो को मान सन्मान देना होता है .कोई भी परिवार हो परिवार में सुख शांति का माहोल बना रहना हो , वो कब होता जब परिवार में सब सभ्य मिल जुल कर रहे , नहीं तोह कोई एक सभ्य के वजह से घर की शांति भंग हो जाती है . घर में जो भी हो एकल परिवार या सयुक्त परिवार में रहते हो . प्रेम से रहना होता है . मिल जुल कर रहोगे . तोह सदा खुस रेह पाओगे , दूसरे को न खुस कर के कोई खुस नहीं रेह सकता .
छोटो को क्या सही है क्या गलत है प्यार से समजाना चाहिए .एक छोटी सी बात को ले कर बेथ जाना ये कोई बात नहीं होती . गस्सा से बात और बिगड़ जाती है . चाहे कोई भी तकलीफ हो उसे प्यार से उस तकलीफ़ का हल निकाल सकते है . जिस परिवार में मिलजुल कर साथ रहते है वो परिवार में खुसी से भरा माहौल छाया हुआ होता है .

Disha shahदिशा शाह
कोलकाता (पस्चिम बंगाल)

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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