Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

प्रतियोगिता परीक्षा पास करने का फंडा-वीरेंद्र देवांगना

प्रतियोगिता परीक्षा पास करने का फंडाःः
प्रशासनिक सेवाओं में जाने के इच्छुक युवाओं को यह प्रश्न बारबार सालता रहता है कि कालेज की पढ़ाई के बाद प्रतियोगिता परीक्षा मे पास होने के लिए एक और पढ़ाई करना पड़ेगा। कोचिंग करना पड़ेगा। गाइड पढ़ना पड़ेगा। इंटरव्यू देना होगा। तभी कोई नौकरी नसीब हो सकेगी।
आप किसी प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हो रहे हों, तो आपको उसके संपूर्ण परीक्षा-प्रणाली की सम्यक जानकारी होनी ही चाहिए। उसका पाठ्यक्रम आपके दिलोदिमाग में हरदम रहना चाहिए। स्मृतिपटल पर सोते-बैठते, उठते-जागते व चलते-फिरते किसी चलचित्र की नाई चलते रहना चाहिए।
आशय यह भी कि आपको पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि रहनी चाहिए, तभी आप पाठ्यक्रम की जानकारी का लाभ उठाकर निरंतर तैयारी में जुटे रह सकते हैं। आप यह तथ्य गांठ बांधकर चलें कि बगैर रुचि के आप किसी प्रतियोगिता परीक्षा को पूरी तरह पास करना तो दूर, उसके पहले पड़ाव को भी पार नहीं कर सकते।
प्रतियोगिता परीक्षा पास करने के लिए आपको रोजाना कम-से-कम 5-6 घंटा पढ़ना और लिखना होगा। वह भी बेनागा, बिना किसी रुकावट के। इसमें ऐसा नहीं हो सकता कि आप सप्ताह के किसी एक दिन दिन-रात पढ़-लिख लिए और बाकी के दिन किताब उलटे-पलटे ही नहीं। इससे तो आप अपने पैर पर आप कुल्हाड़ी मार लेंगे और पढ़े-पढ़ाए पर पानी फिर लेंगे।
किसी प्रतियोगिता परीक्षा में चयनित होने के लिए न्यूनतम 3 वर्ष का समय लगता-ही-लगता है। इसीलिए तीन वर्ष तक धैर्य धारण कर पूरे मनोयोग से तैयारी करने में ही भलाई है। परीक्षा पास करने के लिए आपकी याददाश्त भी तेज होनी चाहिए।
आप जो पढ़ रहे हैं, वह आपको न्यूनतम दो-तीन साल याद रहना ही चाहिए, तभी आप स्मृति का फायदा उठा पाएंगे और पढ़े हुए को परीक्षा में उतार पाएंगे। इसी के साथ यह भी जरूरी है कि आपमें स्थानीय, क्षेत्रीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर विचार रखने की क्षमता होनी चाहिए। आपको मुद्दों को गुण-दोष के आधार पर परखने की कला भी आनी चाहिए।
अंतिम सत्य यह भी कि आप चाहे किसी भाषा के अध्येता या परीक्षार्थी हो, आपको उस भाषा की अच्छी पकड़ होनी ही चाहिए। अर्थात आपकी भाषा परिमार्जित, सुस्पष्ट और त्रुटिरहित होनी चाहिए।
कारण यह कि आपके विचार, आपके उत्तर के रूप में उस चयनित भाषा के माध्यम से ही परीक्षक तक पहुंचते हैं। इसी से परीक्षक अंदाजा लगा लेता है कि आपको विषयों और मुद्दों का कितना ज्ञान है और भाषा पर कितनी पकड़ है?
–00–

54 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype
Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp