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प्रेम

आओ मिलकर एक इबादत, हिंद की खातिर करें
तुम दिया लो ईद का, हम दीप दिवाली का ले
प्रेम गिरधर ने सिखाया, प्रेम की बगिया है यह
एक दूजे के दिलों को, प्रेम से हम सीच चलें

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