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हिम्मत-अंशु कुमत

कुछ दिन यूँ ही कट जाते हैं,
कुछ दिन यूँ ही रह जाते हैं,
रह जाते हैं आँखों में आँसू,
एक हिम्मत बनके क्यों?
हिम्मत है आवाज़ क्यों नहीं,
हिम्मत है आवाज़ क्यों नहीं,

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