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ज़िंदगी-पूनम मिश्रा

कभी परिंदों की तरह बेवजह भी मिला करो जिंदगी कुछ बातें किया करो कुछ शिकायतें किया करो कभी परिंदों की तरह कुछ पल मेरे आंगन में बेवजह भी ठहर जाया करो

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