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तेजस्वी विवेकानंद के ओजस्वी विचार-वीरेंद्र देवांगना

तेजस्वी विवेकानंद के ओजस्वी विचार::
हम जो बोते हैं, वो काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं। हवा बह रही है। वो जहाज, जिनके पाल खुले हैं; इससे टकराते हैं और अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं। पर, जिनके पाल बंधे हैं; हवा को नहीं पकड़ पाते। क्या यह हवा की गलती है? हम खुद अपना भाग्य बनाते हैं।
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