निर्भया के समाज से सवाल – पूनम शर्मा

निर्भया के समाज से सवाल – पूनम शर्मा

क्या 16 दिसम्बर 2012 की वह रात बाकी रातों से अलग थी? क्या मैंने रात को घर से बाहर निकल कर कोई गलती की थी? जो मुझे ऐसी सज़ा मिली। मेरा सपना था कि मैं अपने माता पिता का नाम रौशन करूं। वह मेरे नाम से पहचाने जाएं। पर इस तरह से उन्हें पहचान मिलें,
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चीजो को याद रखना….शिवानी शुक्ला

जब आप किसी पर जरूरत से ज्यादा विश्वास करो और वो विश्वास टूट जाए तो आप बहुत बुरा और अकेला सा महसूस करते हो… तब आप खुद में पूरी तरह से टूट जाते हैं.. और फिर भगवान को कोसते हो या फिर खुद को…! जबकि ऐसा नहीं होता है… पता है क्यों? जब आप किसी
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माँ – शब्द नहीआत्मा है

माँ शब्द नहीं आत्मा है इस धरती के लिए के लिए परमात्मा है माँ वह पवित्र गंगा जल हैजो घर को मंदिर बना देता है माँ सृष्टिकर्ता की अद्भुत अनुपम कृति हैजो अपनी दिव्यता से इस जहाँ को रोशन करती है माँ वह महाकाव्य हैजिसे लिखनेस्वयं सृष्टिकर्ता की लेखनी भीपर्याप्त रूप से समर्थ नहीं है
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धीमा जहर – ऋतु गुप्ता

तंबाकू एक नशा है जो धीरे-धीरे इसां को अंदर से बिलकुल खोखला कर देता है। इसका सेवन करने वाले इस की लत का शिकार हो जाते हैं। यह शरीर में शनै-शनै फैलने वाला जहर है।फायदे के नाम पर सिर्फ व सिर्फ शौक है,बाकी तो नुकसान ही नुकसान है। न जाने कितनी अनगिनत बिमारियों का कारण
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धुन – हेमा पाण्डेय

आज इतने दिनों के बाद मैं बाहर निकली . चली जा रही थी .अपनी ही धुन में. सोचा चलो आज मंदिर ही घूम आते हैं .वहां मन्दिर के अंदर जाने के बाद मैंने पूजा अर्चना की फिर कुछ देर इधर उधर देखा .पलटने ही वाली थी कि मेरी नजर कतार में बैठे उन भिखमंगों पर
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गुरु बिना ज्ञान नहीं – शशी मगरिया

मेरा नाम शशी मगरिया है। और मेरा एक प्यारा सा गांव है। मेरे गांव में हर प्रकार के लोग रहते हैं। उनको देख कर में कुछ बाते सीखा हूँ। जो आज आप को बताना चाहता हूँ। याद रखना एक पेन गलती कर सकता है लेकिन एक पेंसिल कभी भी गलती नहीं कर सकती कयूकि उसके
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सफलता की सीढ़ियाँ-उमेश चन्द यादव

सबकी चाह आगे रहने की , पीछे ना चाहे कोय । अथक परिश्रम जो करे , आगे सबसे होय ।।१ आन मान खानदान का , रखे जो हरदम ध्यान । यश का भागी नर वही , जग में मिले सम्मान ।।२ कर्म करो सब समय पर , व्यर्थ समय ना होय । कदम उठाओ समझ
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भाषा की आशा – पपुल कुमार यादव

बोल सको तो हिन्दी बोलो जो हिन्दुस्तानी की भाषा है। सारा जग हिन्दी बोले हर हिन्दु की अभिलाषा है।। पपुल कुमार यादव 2+

सपने – हेमा पांडेय

जिंदगी भी अजीब है न जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है .कभी धूप कहीं छांव कहीं सपने सजाती है .सपने सभी देखते हैं पर सपने पूरे कहां होता है .. जिंदगी में हम अनेकों अनेकों सपने सजा लेते हैं .जब वह पूरा नहीं होता तो हमें दुख होता है या फिर हम उन सपनों के
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सौन्दर्य से सुन्दर – उत्कर्ष श्रीवास्तव

♡卐♡सौन्दयॆ से सुन्दर लडकी♡卐♡ 卐भारतीय समाज ने पता नही कैसी मानसिकता ओढ रखी है। सभी आकॆषण के शिकार है, कोई भावो को महत्व नही देता। जबकि उससे बडी सुन्दरता और कोई हो ही नही सकती। 卐लडकी मे सुन्दरता से कही ज्यादा भावो की अहमियत होती है। मगर सुन्दरता का ऐसा जाल बुना गया है, कि
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