किसान आत्महत्या क्यों करें” – बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’

किसान आत्महत्या क्यों करें” – बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’

किसान समस्त मानवीय जाति के लिए पालनहार हैं, परन्तु अन्नोत्पादक किसान की वास्तविक स्थिति आज अत्यन्त दयनीय हो चुकी है। उसकी उत्पादकता लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है किन्तु लाभ नगण्य है। उसका सदियों का मोह आसानी से नहीं छूट रहा किसानी के कार्य से। किसानी में उसके प्राण रचते-बसते हैं, उसकी मर्यादा है।
मान लीजिए वह किसानी के कार्य छोड़ भी दें, लेकिन वह करेंगे क्या, वह तो भूखों मर जाएंगे। और इतना ही नहीं यदि किसान खेती करना छोड़ दें तो हम सब मर जाएंगे। धरती पर कौन अनाज उत्पन्न करेगा, अनाज कहाँ से आएगा? इसका विचार करना जरूरी है।
सरकारें, विचारक तकनीकी शिक्षा की बात करते हैं, मैकेनिक बनाते हैं, वायुयान उड़ाने के लिए पायलट बनाने की बात करते हैं, पर ग्रह गमन हेतु यान निर्मित करने हेतु प्रतिभाएँ खोजी जाती हैं, लेकिन किसान के हित की बात केवल भाषणों तक सीमित रहती हैं। कार्य रूप में परिणत नहीं हो पाती हैं।
सरकारें आती हैं, किसानों का कर्ज माफ करती हैं। मैं कहता हूँ ऐसी स्थिति ही क्यों आने देते हैं कि किसान कर्ज में डूबता जाए। उसके लिए ऐसा प्रयास करो कि वह कर्ज ले ही नहीं। वह कर्ज लेते हैं उत्पादन से चुकता न कर पाने की स्थिति में अपनी जोत विक्रय कर देते हैं और किसान से मजदूर बन जाते हैं।
‌‌‌‌‌‌‌‌‌आजादी के सत्तर वर्ष बाद भी उनकी स्थितियाँ बदली नहीं हैं। प्रेमचन्द ने गोदान में जिस किसान से मजदूर बनने की प्रक्रिया का चित्रण किया है, उसका स्वरूप थोड़ा बदल गया है, बाकी है वही। पहले साहूकार थे, अब बैंक हैं, सरकारी अर्द्ध सरकारी संस्थाएँ हैं जो कर्ज देती हैं फिर सूद सहित वसूलती हैं और न चुकता कर पाने की स्थिति में सम्पत्ति की कुर्की, जब्ती का फरमान किसान तक पहुँच जाता है।
सरकारों को किसान सब्सिडी की व्यवस्था करनी चाहिए। कीमतों का निर्धारण इस तरह से करें कि उसकी लागत के अतिरिक्त उसके अन्य खर्चे यथा- बच्चों की परवरिश, शिक्षा, शादी आदि का भार भी वहन हो सके। किसान को उचित लाभ मिल सके। बैंकीय कर्ज की व्यवस्था लचीली होनी चाहिए, महंगाई पर अंकुश होना चाहिए। किसानों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, धनराशि की सहायता आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि ऐसा हो तो किसान आए दिन आत्महत्या क्यों करें?

-बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’
इलाहाबाद, उतर प्रदेश

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

Visit My Website
View All Articles

I agree to Privacy Policy of Sahity Live & Request to add my profile on Sahity Live.

1+

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account