समाज में महिलाओं की बदलती तस्वीर – मीना चंदेल

समाज में महिलाओं की बदलती तस्वीर – मीना चंदेल

प्राचीन काल से आधुनिक काल तक साहित्य ने भारतीय समाज में नारी के स्थान की चर्चा की है | मनुस्मृति में जहाँ ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ अर्थात जहाँ नारियों का सम्मान होता है वहां देवताओं का निवास होता है और जहाँ स्त्रियों का अपमान किया जाता है, वहां सभी प्रकार की पूजा के बाद भी भगवान निवास नहीं करते हैं | कामयानी महाकाव्य में जयशंकर प्रसाद ने नारी तुम केवल श्रद्धा हो , पक्तियां लिखकर नारी को श्रधेय कहा | मैथिलीशरण गुप्त ने नारी को ‘अबला जीवन तेरी यही कहानी आँचल में है दूध , आँखों में पानी’ कहकर उस रूप का वर्णन किया है जब नारी घर की चार दिवारी में बंद शिक्षा से दूर , रुढी-परम्पराओं से घिरी हुई पर्दों और कई बन्धनों में घुट रही थी , पर अब मंजर बदल चुका है | वर्तमान नारी मध्ययुगीन नारियों की तरह परदे में , सामाजिक बंधनों में जकड़ी और शिक्षा से वंचित नहीं हैं | आज वह पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलकर एकतरफ समाज की प्रगति में अपनी भागीदारी निभा रही है तो दूसरी तरफ परिवार गठन और उसका पोषण कर अपना दायित्व बाखूबी निभा रही है | नारी गुणों की खान है उसका सेवाभाव , त्याग , सह्नशक्ति अतुलनीय है | अपनी स्नेह और ममता से नारी ने ही स्वर्ग को धरती पर उतारा है | जिस प्रकार तार के बिना वीणा और पहिये के बिना रथ बेकार है उसी प्रकार नारी के बिना सामाजिक जीवन व्यर्थ है | नारी इस पुरुष प्रधान देश में वरदान की तरह है इसे पुरुष अपनी दासी समझने की भूल न करे , इसका सम्मान करें | ईश्वर ने पुष्पों की कोमलता , मृगों की चंचलता , धरती की क्षमाशीलता , पर्वत की उच्चता ,चंद्रमा की शीतलता , सागर से मर्यादा पालन और गाय से वात्सल्यता आदि गुणों को लेकर नारी के व्यक्तित्व का निर्माण किया है और शायद ही कोई पुरुष इस सत्य को नकार पाए | अपने परिवार के लिए हमेशा बलिदान देने को तैयार नारी देवताओं द्वारा भी पूजनीय है | आज के युग में नारी कही भी पुरुषों से पीछे नहीं है , चाहे वो शिक्षा का क्षेत्र हो राजनीति , वैज्ञानिक या व्यावसायिक हो हर क्षेत्र में नारी अपना परचम लहरा चुकी है | अनगिनत नाम है जिन्होंने देश का नाम आसमान की बुलंदियों तक पहुँचाया है , परन्तु आज भी सर्वेक्षण कहता है कि भारत में कम उम्र में विवाह , दहेज़ के लिए बहुओं पर अत्याचार , घरेलू हिंसा , भ्रूण हत्या और बलात्कारों की बहुत सी घटनाएँ बहुत हैं जो हमें शर्मशार करती है | जिस देश में महिलाएं प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति तक रह चुकी हैं वहां आज भी ग्रामीण महिलाओं की स्थिति चिंतनीय है | हालात सुधरे हैं पर अभी भी मंजिल दूर है | ग्रामीण महिलाये आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न होने के कारण दबा सा महसूस करती है परिवार में उचित सम्मान नहीं पा रही है हलांकि पिछले दशक से महिलाओं की भागीदारी में 13 % का इजाफा हुआ है बाल विवाह की दर में गिरावट आई है |बैंकिंग व्यवस्था में भी 15% भागीदारी बढ़ी है घरेलु हिंसा 37% से घटकर 28% हो गई है , कुछ हालत सुधरें है बहुत सा सुधर बाकि है ग्रामीण औरतें अगर डॉक्टर या शिक्षिका न भी हो तो भी वह अच्छा खाना बनती है ,कपडे सिलती है आचार व् पापड़ बनाना कितने ही ऐसे काम है जो वो घर में रहकर करती है उसे वो अपना व्यवसाय भी बना सकती है पर उन्हें जरूरत है अपनी प्रतिभाओं को निखारनें की , उनके कौशल को उनकी जीवन रेखा बनाने की ताकि समय आने पर उसे व्यवसाय बना सके | महिलाओं की छिपी प्रतिभा और शक्ति को उजागर करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है जो उनके भविष्य को सवांर रहे हैं ,पर इतना ही पर्याप्त नहीं है | हमें भी आवश्यकता है अपनी प्रतिभा को पहचानने की एक कोशिश की | महिलाओं की स्थिति को बेहतर करने के लिए महिला पुरुष सबको साथ चलना होगा हर नारी में छुपी प्रतिभा को निखारना होगा | शहर की महिलाएं आज हर क्षेत्र में कार्यरत है चाहे वो शिक्षा , बेंकिंग , स्वास्थ्य , प्रशासनिक और राजनितिक कोई भी क्षेत्र हो आज नारी का वर्चस्व हर क्षेत्र पर है | कामकाजी महिला का दायित्व पहले की अपेक्षा दुगना हो गया है परिवार की जिम्मेदारिओं के साथ राष्ट्र विकास में भी उसका सहयोग अतुलनीय है | आज जब भारत देश की भावी पीढी पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में अपने संस्कारों को भूलती जा रही है तो नारी की जिम्मेदारी और बढ़ गई है कि वो अपने बच्चों में संस्कारों का संचार करे | एक तरफ जहाँ बेटियों को अच्छे संस्कार उच्च शिक्षा और शारीरिक और मानसिक हर तरह से उनका सर्वागीण विकास करें क्योंकि अब वक्त आ गया है कि लड़कियों को मात्र चूल्हा चौका या परिवार सम्भालना ही उनके जीवन का उदेश्य न बताया जाये बल्कि सर्वश्रेस्ठ बाक्सर मैरिकोम ,गोल्डन गर्ल पी.टी. उषा ,टेनिस खिलाडी सानिया मिर्ज़ा ,बैडमिंटन खिलाडी सेना नेहवाल ,बहादुर नीरजा भनोट , मिस वर्ल्ड एश्वर्या रॉय , प्रियंका चोपड़ा और सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर जैसी महान हस्तियों को अपने जीवन का आदर्श बनाकर कुछ अलग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाये | वहीँ दूसरी तरफ लड़कों में भी उच्च संस्कार , नारी सम्मान , बड़ों का आदर , नशे से दूर रहना और देश की प्रगति में भागीदार बनने के लिए माँ ही बच्चों को रास्ता दिखा सकती है | आज ये सबसे प्रमुख जिम्मेदारी नारी के कन्धों पर है और महिलाएं बखूबी उसे निभा भी रही हैं | आज नारी ने वो मुकाम हासिल कर लिया है जिस पर न केवल परिवार और समाज बल्कि पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है |

मीना चंदेल
बिलासपुर [हि.प्र]

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

Visit My Website
View All Articles

I agree to Privacy Policy of Sahity Live & Request to add my profile on Sahity Live.

0
Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account