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“समलैंगिकता”-अंजू तंवर

कुछ शब्द ऐसे होते है जिनको देखते ही उनका अर्थ निकल जाता है, या कहे ही ऐसे शब्द जिनके कारण समाज उनसे मुंह मोड़ लेता है ।
“समलैंगिता” शब्द के अर्थ से ही पता चलता है कि सामान लेंगीग के लोग।

“समलैंगिक क्या है:

आमतौर पर देखा गया है कि बचपन से ही कुछ बच्चो में शारीरिक विकास ऐसे होने लगता है कि वह अपने से विपरीत लोगो की तरह बनने कि चाह रखने लगते है, ओर अपने लेंगिग की श्रेणी की तरफ आकर्षित हो जाते है। शुरुआत में अगर वह लड़का हो तो लड़कियों की तरह सजना उनके कपड़े पहना, मेकअप करना, उनकी तरह बाते करना, और यदि लड़की है तो लड़को की तरह व्यवहार करना, माता पिता उनको बचपन से ऐसी चीजे करके देखते है पर उन्हें लगता है ये उनका बचपना है उन्हें खुला छोड़ देते है, परन्तु जब बड़े होने के बाद उनका यही व्यवहार होने लगता है तो परिवार उनको समझने की बजाए दरिंदगी से पेश होने लगते है,
नतीजा निकलता है कि या तो वह मनसिक अवसाद में आजाते है या कोई गलत कदम उठा लेते है।

समलैंगिकता अभिशाप है या भगवान का वरदान

जब जब समलैंगिक की बात आता है प्रश्न उठता है कि यह समाज के लिए अभिशाप है या कोई वरदान
जहां तक बात करे ना तो यह अभिशाप है और ना कोई वरदान साबित हुआ है,
यह प्राकृतिक है, पुरुष में स्त्री और स्त्री से पुरुष के विपरीत जब शारीरिक गुण या उनके विकास होने लगता है, जब समलैंगिक का विकास होता है,
इसमें एक ही लैंगीग के इंसान आकर्षित होने लगते है।
माता पिता को लगता है यह कोई बीमारी है वह उनको दिन रात डॉक्टर से इलाज करवाते है, और अंधविश्वास में लीन होकर तांत्रिक विधा से झाड़ फूक करवाने लग जाते है। और नतीजा उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।

क्या समलैंगिक विवाह उचित है

“मनुस्मृति” में विवाह के लिए पुरुष और स्त्री का संबंध पवित्र माना गया है, जहां “समलैंगिक विवाह” की बात आती है वहा समाज इस विवाह को उचित नहीं मानता, समाज का मानना है कि यह विवाह धर्म और प्रकृति के विरूद्ध है।
वहीं इस श्रेणी के लोग “समलैंगिक” मानते है कि प्रेम की कोई भाषा, धर्म, जाति या लिंग नहीं होता,
जब शुरुआती दौर में यह सुना गया तब सभी लोग अचंभित थे, क्युकी कुछ लोगो ने समाज को परे रखकर अपने रिश्ते को स्वीकार किया और विवाह किया,
वर्तमान में जहा हर कार्य के लिए स्वतंत्रता दी गई है वहीं लोग “समलैंगिक” बाते करने से भी कतराते है।
देश में 10% लोगो में 2% लोगो ने अपने रिश्ते स्वीकार लिए है, और अधिकतर मामलों में विवाह के बाद या तो उन्हें समाज से बहिष्कार कर दिया जाता है , या “आनर किलिंग” (मर्डर ) कर दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट से न्याय की आस

समलैंगिक लोगो को समाज से बहिष्कार करने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा,
2,3 साल बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को मंजूरी दे दी, की वह अपने मर्जी और मनपसंद से सम्बन्ध बना सकते है यह गैर कानूनी नहीं है।
अब देखना यह होगा कि समाज के लोग समलैंगिक लोगो को स्वीकार करते है?

अंजू कंवर

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