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सुबह जल्दी उठने की आदत -वीरेंद्र देवांगना

सुबह जल्दी उठने की आदत ::
कामयाब लोगों की दिनचर्या का अवलोकन करने पर इसी तथ्य व सत्य से रूबरू होना पड़ता है कि उनका जीवन घड़ी की सूई की माफिक चलता था। वे अक्सर अपनी घड़ी को पांच-दस मिनट आगे रखते थे। वे सुबह के छह बजे हलहाल में बिस्तर छोड़ देते थे। वह भी रोजाना, बिना नागा, बगैर आलस्य दिखाए। चाहे ठंड, बरसात या गरमी का मौसम हो, उनके लिए सुबह उठना बेहद जरूरी हुआ करता था।
हम सफल शख्सियतों की जीवनचर्या का बारीकी से विश्लेषण करेंगे, तो पाएंगे कि उनमें अल्सुबह उठने की आदत में गजब की समानता थी, जो उनकी कामयाबी को चार चांद लगाने के काम आती थी।
सुबह जल्दी उठने से ताजी हवा लेने का सुख मिलता है, जो फेफड़े से होकर दिल-दिमाग तक जाता है। सुबह की शीतल मंद समीर नए विचार और जीवन में उल्लास भर देता है।
जिस ताजी हवा के लिए दिल्ली सहित तमाम महानगरवासी तरस रहे हैं। आक्सीजन मास तथा आक्सीजन मशीन के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं, वह दुर्लभ शुद्ध पवन आपको मुफ्त में नसीब हो रहा है। क्या यह किसी अन्य फायदे से कमतर हो सकता है?
दूसरा, आप दिनभर के काम को प्राथमिकता के साथ व्यवस्थित कर सकते हैं कि कौन-सा काम महत्वपूर्ण है और कौन-सा गौण? फिर जब काम में जुटते हैं, तो पहले अहमियतभरा काम पूरा करके शेष गौण काम सुकून के साथ निपटा सकते हैं। इससे आपको खूब तसल्ली व दिली सुख-शांति मिलती है, जो पैसों से खरीदी नहीं जा सकती। लिहाजा, यह शांति आपके सेहत को अक्षुण्य बनाए रखने में मददगार हो सकता है। आप टेंशन फ्री रहकर काम करने का सुखमय माहौल बना लेते हैं।
तीसरा, आपको व्यायाम, योग-प्राणायाम, जागिंग, सायकिलिंग, वाकिंग, प्लेयिंग का पर्याप्त समय मिलता है। सुबह के समय का सदुपयोग करके आप अपने स्वास्थ्य को शानदार बना सकते हैं।
सुना ही होगा-एक तंदुरुस्ती, हजार नियामत। गर आप सेहतमंद हैं, तो आपको कामयाबी से कोई नहीं रोक सकता। आप सेहतमंदी के साथ ज्यादा-से-ज्यादा समय अपने लक्ष्य की प्राप्ति में लगा सकते हैं, जो आपको सफलता-सूर्य के दर्शन करा कर ही दम साधेगा।
इसके विपरीत, जिसका स्वास्थ्य खराब रहता है, उसका धन और ध्यान बिगडे़ स्वास्थ्य पर जाता रहता है। जब कोई व्यक्ति तन व मन से रुग्ण रहता है, तब उससे बड़ी कामयाबी दूर छिटकती चली जाती है।
कारण कि कामयाबी इम्तहान लेती है और इम्तहान में वही पास होता है, जो निरोगी काया का धनी होता है। क्या आप ऐसे किसी शख्स को जानते हैं, जो कामयाब है, पर सेहतमंद नहीं है? यह नामुमकिन है! कामयाबी है, तो सेहतमंदी है और सेहतमंदी है, तो कामयाबी है। दोनों का चोली-दामन का साथ है।
चैथा, ऐसे व्यक्ति के घर-परिवार के सदस्य भी, मुखिया या युवा की देखा-देखी जल्दी उठते हैं और वही सब करते हैं, जो मुखिया/युवा स्वास्थ्य लाभ के लिए करता है। इस प्रकार सारा परिवार स्वस्थ व प्रसन्न नजर आता है। इसका प्रभाव समाज में भी पड़ता है। आसपास का वातावरण भी सेहतमंद रहता है।
स्वस्थ रहने के कारण मन पढ़ाई में रमता है। बच्चे यूपीएससी, पीएससी, बैंक आफीसर, रेलवे आफीसर और दूसरी बड़ी परीक्षाओं में बड़ी-से-बड़ी कामयाबी हासिल करके घर-परिवार का नाम रौशन करनेवाले निकलते हैं।
सभी को एक दिन के 24 घंटे मिलते है। इसमें भी स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटा सोना जरूरी रहता है। इसलिए, हमें रात के 11 बजे तक हर हाल में बिस्तर में पहुंच जाना चाहिए। अगर सुबह छह बजे उठकर नौ बजे तक दिनचर्या निपटा लें और एकआध धंटे का लंच समय छोड़ दें, तो शाम तक बमुश्किल 9-10 घंटे का समय काम के लिए मिलता है।
इसका बेहतर उपयोग करके कामयाबी के शिखर पर पहुंचा जा सकता है या दुरुपयोग करके जीवन को अंधकार में डुबोया जा सकता है। कामयाब लोगों ने यही किया और नाकामयाब लोगों ने यह नहीं किया। इसलिए कोई सफल रहा, तो कोई विफल।
यह सिद्धांत हर उस व्यक्ति के लिए काम करता है, जो सफलता का आकांक्षी है। क्योंकि सफल लोगों ने इसी मार्ग का अनुसरण करके बड़ी कामयाबी हासिल किया है। इससे अलग गरिमामय व सम्मानजनक सफलता का शार्टकट है ही नहीं। सफलता की यही कुंजी है।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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