तंबाकू और उसके गुलाम -मनोज कुमार

तंबाकू और उसके गुलाम -मनोज कुमार

हमारे समाज में अनेकों बुराइयां हैं तरह-तरह के नशे किए जाते हैं जो की सभ्यता के जन्म से ही हैं, ऐसे में एक नशा तंबाकू भी है, तंबाकू का जन्म अमेरिका में हुआ माना जाता है यहां के लोग इसे बहुत पहले से इस्तेमाल करते आ रहे हैं, तंबाकू इस पौधे की पत्तियों से बनता है इन हरी पत्तियों को सुखाकर तंबाकू बनाया जाता है इसके परिवार में आज 70 सदस्य मौजूद हैं यानी कि धरती पर इसकी 70 प्रजातियां पाई जाती हैं , तंबाकू आज कई किरदारों में नजर आते हैं जैसे कि सिगरेट, सिगार, स्मोकिंग, पाइप तंबाकू, शीशा तंबाकू ,पत्ति, यह चबाने वाला और डिपिंग भी होता है साउथ अफ्रीका में इसकी खेती बहुत अच्छी की जाती है मेक्सिको में इसका उपयोग 1400 से 1000 बी सी में हुआ इंडीज पहले यूरोपियन थे जिन्होंने 1559 मैं यूरोप में इसके बीज बोए थे विश्वव्यापी विजय यात्रा पर निकले इस तंबाकू ने तुर्की में 1600 सन में अपने पांव पसारे और भारत पहुंचने में भी इसे किसी तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ा, 19वीं सदी में इस खानदान के राजकुमार का जन्म हुआ जिसका नाम सिगरेट रखा गया जिसको मुंह लगाकर पीने वाले खुद को किसी महाराजा से कम तो नहीं समझते, पीने वालों को इस तंबाकू में बहुत से गुण नजर आते होंगे लेकिन इसका एक गुण कम से कम पीने वालों के लिए तो यह गुण ही है जिसका नाम निकोटीयाना है यह इतना खतरनाक है किसकी वजह से आदमी को अपने शरीर से कैंसर के संक्रमण के कारण उसके जीवन का कोई हिस्सा उसके शरीर का कोई अंग जैसे की जीभ और जबड़ा भी बाहर निकलवाना पड़ता है एक शख्स ने गुटखा सिर्फ 3 साल पहले खाना शुरु किया और उसे अपने शरीर के साथ ऐसा करवाना पड़ा कोई शक्स 3 साल में बहुत ज्यादा कामयाब नहीं हो सकता मगर इस उदाहरण से पता चलता है कि वह बहुत ज्यादा बर्बाद हो सकता है, इस तंबाकू में टार पाया जाता है जो कि बेहद खतरनाक है डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व में हर साल 3800000 लोग गैर संचारी रोग जिसे एनडीसी कहा जाता है से मारे जाते हैं जिसमें 25% मध्यमवर्ग होता है एक सर्वे के अनुसार भारत में 2020 तक तंबाकू से मरने वाले लोगों की संख्या 53 प्रतिशत होगी और यह कोई हमारी उपलब्धि तो नहीं है बल्कि कमजोर निष्ठा का ही सबूत है भारत सरकार द्वारा 2003 में तंबाकू निषेध कानून भी बनाया गया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की ज़िम्मेदारी ली जा रही है पर कुछ तो नागरिकों की अपनी भी जिम्मेदारी है, तंबाकू के कुछ रिश्तेदारों का परिचय इस प्रकार है तंबाकू पान बेटा ,सुपारी बीवी ,बुझे हुए चूने का मिश्रण छोटा चाचा, मैनपुरी तंबाकू मम्मी, चरैट पापा, गठाकु मौसा ,चिलम दादा, और हुक्का नाना, तंबाकू कोई देश का राजनेता yaa आतंकवादी नहीं है जो कि दोगला हो कई जगह पर तो साफ-साफ लिखा जाता है खुद तंबाकू के रैपर पर लिखा जाता है कि मैं सेहत के लिए खतरनाक हूं चित्र बनाकर बच्चों की तरह समझाया जाता है कि मैं किसी का सगा नहीं हूं फिर भी लोग इसका सेवन इस प्रकार से करते हैं जैसे जीवन की जरूरत का एक हिस्सा हो कुछ लोगों के लिए तो सुबह का नाश्ता इस ही से शुरू होता है और रात का डिनर भी इस पर ही खत्म होता है ,जाने क्यों हम इंसानो ने खुद को इस गंदगी का गुलाम बनाया हुआ है इसका सेवन करने वाला कैंसर से जकड़ा गया एक व्यक्ति खुद जैसे अपने हाथों से अपने परिवार को जीते जी मार देता है आर्थिक मानसिक और आत्मिक रूप से, इसमें हमारा समाजिक चलन भी कुछ कम नहीं है शादी ब्याह या नुक्तो में बीड़ी सिगरेट की थाली सामने परोस दी जाती है गुड़गुड करने वाला हुक्का अपनी शान में जरूरी समझा जाता है कुछ बिगड़े हुए बुजुर्ग बुजुर्गों को बिगड़ा हुआ कहकर मैं उनका अपमान बिल्कुल भी नहीं करना चाहता लेकिन बिगड़ा हुआ कहकर मैं उन्हें यह समझाना चाहता हूं की यह आदत गंदी है और अब हमें इसे छोड़ देना चाहिए कुछ लोग इस नशे की आदत को छोड़ने में हिचकते हैं इसलिए दृढ़ निश्चय नहीं कर पाते नशा छोड़ना बस नजरिए भर की बात है , इसके लिए मैं एक कहानी सुनाता हूं जिसे कहानी ना मानकर जिंदगी की एक शाश्वत कहावत मानी जावे कहावतें जो समय के साथ भी नहीं बदलती, एक गडरिया अपनी भेड़ों को चरते हुए मैंदानो की तरफ निकाल आया कुछ दिन भेड़ चराने के बाद उसके पीने का तंबाकू खत्म हो गया उसकी बीवी और बच्चे भी भेड़ चराते समय उसके साथ ही रहा करते थे जब उसका तंबाकू खत्म हुआ तो उसने दूसरे सह गडरिया से अपनी बीवी को तंबाकू मांग लाने के लिए कहा बीवी उस गडरिया के पास गई और उससे तंबाकू की मांग की , उसने कहा की उसके पति को तंबाकू चाहिए उसे बड़ी जोर की तलब लगी है गडरिया ने तंबाकू देने का वादा एक शर्त पर किया कि वह तंबाकू तो दे देगा मगर पहले वह अपने पति से पूछ कर आए कि वह अपनी पत्नी को मुझे दे देगा, पत्नी ने यह बात अपने पति को बताई गडरिया पति बड़ी असमंजस में था उसका दिमाग घूम रहा था लेकिन अंत में उसने फैसला किया कि उसे तंबाकू नहीं चाहिए इसके पीछे उसका नजरिया यह था की उसे ऐसा नशा या ऐसा तंबाकू नहीं चाहिए जिसकी वजह से वह अपनी प्राण प्रिय पत्नी को भी दांव पर लगा दे और उसने उस दिन के बाद तंबाकू को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया

Manoj Kumarमनोज कुमार
जयपुर राजस्थान

MANOJ KUMAR

मैं मनोज कुमार जयपुर राजस्थान का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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