मां - Mk Rana

मां     Mk Rana     कविताएँ     बाल-साहित्य     2022-08-16 23:26:44         3981           

मां

         मां शीतल की गंगा है,
        मां पीपल की छांव है,,
                   मां का दूध बड़ा अनमोल,
                   जिसका यहां ना कोई तोल,,
        मां की गोद स्वर्ग समान,
        मां की आंचल निर्मल जल समान,,
                   उंगली पकड़कर चलना सिखाए,
                   खुद जग-जग कर वह हमें सुलाए,, 
        भूखी प्यासी मां रह जाती,
         पर हमें भरपेट खिलाती,,
                   मां की कर्ज कोई तोड़ ना पाए,
                   मां की व्याख्या कोई कर ना पाए,,
                    

Related Articles

मां की चुन्दड़ी सितारों जड़ी
Chanchal chauhan
तेरी चुन्दड़ी मैया सितारों जड़ी, लाल लाल चुंड़ी मीना जड़ी, चन्दा जैसा मुख,नथ हीरा जड़ी।
13754
Date:
16-08-2022
Time:
22:26
मिलन
Brahamin Sudhanshu "SUDH"
एक छोटी सी बात है! तुम्हें आज बता दूं क्या!! जज्बातों का सैलाब हो तुम! दिल मे तुम्हें बसा लूँ क्या!! कुछ देर बै
12041
Date:
16-08-2022
Time:
22:27
कभी ना भूलना,परिवार,गुरु को
Danendra
चाह कर भी ना, छोड़ सकु मै, उस प्यार को जिसने मुझे जन्म से, आज तक सुख दुख में ,रोते रोते हसना सिखाया है। उस परिवार मात
12095
Date:
16-08-2022
Time:
22:27
Please login your account to post comment here!